पश्चिम बंगाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने मनरेगा योजना को फिर से शुरू करने के आदेश देने के कोलकाता हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर केंद्र सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया है और एक अगस्त से मनरेगा योजना को शुरू करने का आदेश दिया था.
केंद्र पर अदालत की अवमानना का आरोप
हाई कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार को यह अधिकार है कि वह पश्चिम बंगाल में योजना लागू करने के दौरान विशेष शर्ते, नियम और प्रतिबंध लागू कर सकती है ताकि पहले जैसी गड़बड़ियों की पुनरावृत्ति न हो. पश्चिम बंग खेत मजदूर समिति ने केंद्र सरकार पर अदालत की अवमानना का आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट का रुख किया था. जिसकी याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने यह आदेश दिया था.
19 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान कहा था कि अगर किसी ने फर्जी नामों से मजदूरी ली है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जिन्होंने ईमानदारी से काम किया है उन्हें उनका हक मिलना चाहिए. कोर्ट ने साफ कहा था कि केंद्र चाहे तो योजना में कड़े नियम और शर्ते लागू करें, लेकिन मजदूरों का हक रोका नहीं जा सकता है.
19 जिलों में भ्रष्टाचार की रिपोर्ट
बता दें कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया है कि केंद्रीय टीम द्वारा 19 जिलों में भ्रष्टाचार की जो रिपोर्ट दी गई थी, उसपर राज्य सरकार ने कोई सकरात्मक कदम नहीं उठाया. हालांकि राज्य सचिवालय ने इन आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया है. वहीं केंद्र ने मनरेगा योजना में एक नया नियम लागू किया है. जिसके तहत साल के पहले छह महीनों में कुल स्वीकृत काम का 60 फीसदी से अधिक काम नहीं किया जा सकता.
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा केंद्र सरकार की तरफ से शुरू की गई रोजगार गारंटी योजना है. इसका मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में.सभी लोगों को हर साल 100 दिन के रोजगार प्रदान करके ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सुरक्षा को बढ़ाना है.
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-भारत एक्सप्रेस
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