सुप्रीम कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों द्वारा अपने संविधान, नियम और कायदों को अपनी वेबसाइट पर डालने के आदेश देने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और विधि मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह नोटिस जारी किया है. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर की गई है.
लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली का मार्ग
कोर्ट ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने धर्मनिरपेक्षता, पारदर्शिता और राजनीतिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए राजनीतिक दलों के रजिस्ट्रेशन और नियमन के लिए नियम बनाने हेतु चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर भी नोटिस जारी कर चुका है. दायर याचिका में कहा गया था कि संविधान के दायरे में राजनीतिक दलों को विनियमित करने का कदम मजबूत लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली का मार्ग प्रशस्त करेगा.
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि बोगस राजनीतिक पार्टियां न सिर्फ लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा हैं, बल्कि दुर्दांत अपराधियों, अपहरणकर्ताओं, ड्रग्स स्मगलरों और मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों से मोटी रकम लेकर उन्हें राष्ट्रीय और प्रदेश प्राधिकारी बनाकर देश की भी छवि खराब कर रहे हैं.
राजनीतिक दलों के लिए नियम-रेग्युलेशन नहीं
याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक दलों के लिए कोई नियम और रेग्युलेशन नहीं है. इसलिए कई अलगाववादियों ने चंदा इकठ्ठा करने के लिए अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई है. इन दलों के कुछ पदाधिकारी पुलिस से सुरक्षा पाने में भी सफल रहे हैं.
याचिका में यह भी कहा गया है कि 13 जुलाई को पड़े छापे में इंडियन सोशल पार्टी और युवा भारत आत्मनिर्भर दल नाम के दो राजनीतिक दलों के पास से 500 करोड़ रुपये का काला धन मिला था. उसी तरह 12 अगस्त को एक और फर्जी राजनीतिक पार्टी, नेशनल सर्व समाज पार्टी का पता चला जिसने 271 करोड़ रुपये की राशि जमा की थी.
याचिकाकर्ता के अनुसार यह पार्टियां हवाला के जरिए नकदी में दान लेती थी. उसके बाद 20 फीसदी कमीशन काटकर चेक से दानदाताओं को पैसा लौटाती थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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