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सुप्रीम कोर्ट ने 2017 मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम पर जनहित याचिका NHRC को किया ट्रांसफर

सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम को लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) में ट्रांसफर कर दिया है.

Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम को लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) में ट्रांसफर कर दिया है. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने यह आदेश दिया है. साथ कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार द्वारा दायर हलफनामे को रिकॉर्ड पर ले लिया है.

NHRC को पक्षकार बनने का मिला निर्देश

कोर्ट ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल कानून 2017 को लागू करने के लिए वैधानिक प्राधिकरण गठित किए गए हैं. यह याचिका वकील गौरव कुमारबंसल ने 2018 में दायर किया था, जिनकी याचिका पर कोर्ट ने एनएचआरसी को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया था.

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से याचिकाकर्ता को केंद्र सरकार का हलफनामा मुहैया कराने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया था कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल कानून 2017 को लागू करने के लिए जनहित याचिका को एनएचआरसी को ट्रांसफर किया जा सकता है.

याचिकाकर्ता ने कमेटी के गठन का दिया सुझाव

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता गौरव बंसल ने कहा था कि कानून के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जा सकती है. याचिकाकर्ता ने इस मामले की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमेटी के गठन का सुझाव दिया था. लेकिन कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस सुझाव को मानने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि हम समानांतर तंत्र नहीं बना सकते है.

कार्यान्वयन में लापरवाही का आरोप

दायर याचिका में केंद्रीय मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण और मानसिक स्वास्थ्य पुनरावलोकन बोर्ड की स्थापना और कार्यान्वयन में लापरवाही का आरोप लगाया गया है. बता दें कि उत्तर प्रदेश के बदायूं के छोटे-बड़े सरकार दरगाह में मानसिक रूप से बीमार लोगों को ईलाज के नाम पर जंजीर से बांध कर रखने पर सुप्रीम कोर्ट नाराजगी जता चुका है.

कोर्ट ने कहा था कि मानसिक रूप से बीमार शख्स को चेन में बांधकर नहीं रखा जा सकता है ये उनके अधिकारों और उनके सम्मान के खिलाफ है. कोर्ट ने कहा था कि एक मानसिक रोगी भी इंसान है, उसकी अपनी भी गरिमा है. अगर वो हिंसक भी है, तो उन्हें अकेले रखा जा सकता है, चेन में बांधना समाधान नहीं.

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-भारत एक्सप्रेस



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