Bharat Express DD Free Dish

नागरिकता 1983 में तो 1980 में कैसे बना वोटर ID? सोनिया गांधी से जुड़े 44 साल पुराने मामले में 21 सितंबर को फैसला

नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने के आरोप से जुड़ी सोनिया गांधी की पुनर्विचार याचिका पर फैसला टल गया है. राउज एवेन्यू कोर्ट अब 21 सितंबर को फैसला सुनाएगा.

Sonia Gandhi Voter List Case Rouse Avenue Court Postpones Verdict To September 21 Bharat Express
Edited by Vaibhav Gupta

कांग्रेस संसदीय दल के अध्यक्ष सोनिया गांधी से भारतीय नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के मामले में दायर पुनर्विचार याचिका पर राऊज एवेन्यु कोर्ट ने फैसले को टाल दिया है. स्पेशल जज डॉ. विशाल गोगने छुट्टी पर है, जिसके चलते सुनवाई टल गई है. कोर्ट 21 सितंबर को फैसला सुनाएगा.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दोनों पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने कई गंभीर आरोप लगाए. वही सोनिया गांधी की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि शिकायतकर्ता ने गलत दस्तावेज लगा रखा है.

जाली दस्तावेज या धोखाधड़ी मुमकिन

पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा था कि आप यहां अदालत के समक्ष एफआईआर दर्ज करने के लिए अनुरोध करने आए हैं, जबकि यह मामला आधी सदी पुराना है. किसकी जांच की जाएगी? आप दायरा बढ़ा रहे है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा था कि आज की तारीख में एकमात्र जानकारी जो आप दे रहे हैं, वह नाम जोड़ने और हटाने की परिस्थिति है.

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा था कि यह एक विदेशी नागरिक द्वारा किए गए घोषणा पत्र का मामला है. हम कोर्ट को यह दिखाने की कोशिशें कर रहे है कि यह केवल जाली दस्तावेज या धोखाधड़ी के जरिए से ही किया जा सकता था. हमने मतदाता सूची की एक प्रति के लिए आवेदन किया था और प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई गई थी.

1983 में बना नागरिक तो 1980 में नाम कैसे

वहीं सोनिया गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आर एस चीमा ने इसका विरोध किया था. कोर्ट ने वकील से पूछा था कि आप इस मुद्दे को कैसे सही ठहराएंगे कि वह 1980 में मतदाता सूची में थी, जबकि 1983 में नागरिक बनी. यह मूलभूत मुद्दा है.

इसपर सोनिया गांधी के वकील ने कहा था कि क्या इस बात का कोई सबूत है कि आवेदन करने से पहले वह नागरिक थी? क्या कोई व्यक्ति आवेदन दाखिल करने से पहले नागरिक नही हो सकता? कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि आप जो मांग रहे है, वह चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ एक आवारा और मछली पकड़ने जैसी जांच है.

सोनिया गांधी ने उनके खिलाफ याचिका दाखिल किए जाने का विरोध किया है. यह रिविजन पिटीशन वकील विकास त्रिपाठी ने दायर किया है. इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 11 सितंबर को विकास त्रिपाठी की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ उन्होंने सेंशन कोर्ट में याचिका दायर की है.

याचिका में कौन से आरोप लगे?

दायर शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिक बनने से पहले ही मतदाता सूची में दर्ज करा दिया गया था. यह याचिका विकास त्रिपाठी की ओर से दायर की गई थी. दायर याचिका में दावा किया गया था कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किया गया था. जबकि आधिकारिक तौर पर वह अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिक बनीं.

याचिका में कहा गया था कि मतदाता सूची में नाम दर्ज करने के लिए भारतीय नागरिक होना जरूरी है, लेकिन 1980 में सोनिया गांधी की स्थिति अलग थी. याचिका में सवाल उठाया गया था कि नई दिल्ली लोकसभा सीट पर वोटर लिस्ट में सोनिया गांधी का नाम कैसे शामिल था?

हालांकि बीजेपी ने पहले आरोप लगाया था कि सोनिया गांधी ने नागरिकता मिलने से पहले ही वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वा लिया था.

यह भी पढ़ें: दिल्ली जल बोर्ड एसटीपी टेंडर घोटाला: पूर्व CEO उदित प्रकाश राय और नागेंद्र यादव 2 दिन की ACB रिमांड पर

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read