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हौज खास डियर पार्क के हिरणों का राजस्थान जाना तय; सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी, केंद्र को गाइडलाइंस बनाने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के हौज खास स्थित ए.एन. झा डियर पार्क से हिरणों को राजस्थान के वन्य अभयारण्यों में स्थानांतरित करने के फैसले को बरकरार रखा है और केंद्र सरकार को देशभर में वन्यजीव स्थानांतरण के लिए व्यापक दिशा-निर्देश तैयार करने का निर्देश दिया है.

Supreme Court Final Deadline in Sheena Bora Murder Case

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के हौज खास स्थित एएन झा डियर पार्क हिरणों को राजस्थान स्थानांतरित करने की मंजूरी दे दी है. कोर्ट ने केंद्र सरकार को वन्यजीव स्थानांतरण के लिए दिशा निर्देश तैयार करने का निर्देश दिया है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह निर्देश दिया है. कोर्ट ने दिल्ली के हौज खास स्थित एएन झा डियर पार्क से हिरणों को राजस्थान के बाघ अभयारण्यों में स्थानांतरित करने के फैसले को बरकरार रखा है. साथ ही देशभर में वन्यजीवों के स्थानांतरण को विनियमित करने के लिए व्यापक निर्देश जारी किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए यह फैसला दिया है. हाई कोर्ट ने हिरणों  को दिल्ली से बाहर के स्थानों पर स्थानांतरित करने के साथ-साथ उनमें से कुछ को डियर पार्क में ही रखने का आदेश दिया था. इससे पहले एक गैर सरकारी संगठन न्यू दिल्ली नेचर सोसाइटी ने भी याचिका दायर की थी.

गर्भवती हिरणों और शावकों की सुरक्षा को लेकर चिंता

याचिका में कहा गया था कि हौज खास से लगभग 600 हिरणों को उचित आवास आकलन, पशु चिकित्सा जांच या गर्भवती हिरणों और उनके बच्चों जैसे कमजोर समूहों के लिए सुरक्षा उपायों के बिना स्थानांतरित किए जाने की संभावना है. एनजीओ की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि वह मॉनसून के मौजूदा सीजन में हिरणों को यहां से कही और विस्थापित करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दे. याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि ऐसा करना सेंट्रल जू ऑथोरिटी की गाइडलाइंस के खिलाफ है. याचिका में कहा गया था कि अब तक तीन समूहों के हिरणों को वन्यजीव संरक्षण कानूनों का उल्लंघन करते हुए राजस्थान के अभयारण्यों में भेजा जा चुका है, जो न केवल अनुचित है, बल्कि ये बेजुबानों के जीवन के लिए खतरनाक भी हो सकता है.

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन का आरोप

याचिकाकर्ता का कहना था कि डीडीए और अन्य प्राधिकरणों ने हिरणों के स्थानांतरण में न तो किसी आवासीय मूल्यांकन की प्रक्रिया अपनाई, न ही इस बात पर ध्यान दिया कि गर्भवती हिरणों और नवजात शावकों को क्या जोखिम हो सकता है. इसके चलते यह कदम वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है.

दरअसल डीडीए ने दिल्ली के हौज खास क्षेत्र स्थित हिरण पार्क में बचे हिरणों को राजस्थान के जंगलों में स्थानांतरित करने का फैसला लिया था.

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-भारत एक्सप्रेस



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