पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के नेता एएस इस्माइल की ओर से दायर अंतरिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को निपटारा कर दिया. जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना दवे पाठक की दलील को रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें बताया गया कि तिहाड़ जेल में फिजियोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध है और इस्माइल को प्रतिदिन एक घंटे की फिजियोथेरेपी दी जाएगी.
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने तिहाड़ जेल प्रशासन से पूछा था कि क्या जेल के भीतर ही उचित चिकित्सा सुविधा दी जा सकती है. इस आधार पर कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया.
इस्माइल ने की अंतरिम जमानत की मांग
इस्माइल को गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) 1967 के तहत गिरफ्तार किया गया था और उसने मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत की मांग की थी. दिल्ली हाई कोर्ट ने इससे पहले इस्माइल की याचिका खारिज कर दी थी, यह कहते हुए कि ट्रायल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है. इस्माइल ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
इस्लामिक खिलाफत की स्थापना की साजिश
यह मामला देश में इस्लामिक खिलाफत की स्थापना के लिए कथित साजिश से जुड़ा है, जिसमें एनआईए ने 19 लोगों, जिनमें राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद के 12 सदस्य शामिल हैं, के खिलाफ पांचवी चार्जशीट दायर की है. इनमें ओएमए सलाम, ईएम अब्दुल रहमान, अनीस अहमद सहित कई नाम शामिल हैं. एनआईए का दावा है कि पीएफआई ने देश में दहशत फैलाने और सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की साजिश रची, जिसमें अब तक 105 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है.
एनआईए ने आरोप लगाया कि इस्माइल ने मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर भारत सरकार और इस्लामी शासन के खिलाफ न मानने वाले संगठनों के नेताओं के खिलाफ भड़काया. इस्माइल का अतीत स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) से जुड़ा रहा, जहां वे पीएफआई के तमिलनाडु अध्यक्ष रहे और बाद में राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद के सदस्य बने.
दूसरी ओर, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पीएफआई के तीन नेताओं—परवेज अहमद, मोहम्मद इलियास और अब्दुल मुकीट—को दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत दी थी, यह कहते हुए कि उनके खिलाफ मनी लॉंड्रिंग का अपराध सिद्ध नहीं होता. इस्माइल की सेहत को लेकर चिंता जताई गई थी, लेकिन कोर्ट ने जेल में चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के बाद याचिका बंद की.
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