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शादी का झूठा वादा कर रेप के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित, कहा – हर असफल रिश्ते को अपराध नहीं माना जा सकता

सुप्रीम कोर्ट ने शादी के झूठे वादे पर रेप के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई, कहा कि टूटे रिश्तों को आपराधिक मामला नहीं बनाया जाना चाहिए. कोर्ट ने रूढ़िवादी मानसिकता और न्यायिक खामियों पर भी सवाल उठाए.

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शादी का झूठा वादा कर रेप के मामले दर्ज कराने की बढ़ती प्रवृति पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता व्यक्त की है. जस्टिस एमएम सुंदरेश और राजेश बिंदल की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि गलत हो चुके रोमांस और जोड़े के टूटने के मामले दर्ज नहीं किए जाने चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि रूढ़िवादी मानसिकता काम कर रही है, क्योंकि यहां पुरुष को दोषी ठहराया जाता है. हमारी व्यवस्था में खामियां है. अगर कुछ करना है तो कई बार लड़की अपने ससुराल वालों के खिलाफ 5 केस कर देती है. कोर्ट ने कहा इतने बड़े वकील को नियुक्त करना, हम यह नही कह सकते कि लड़की इतनी भोली है.

रूढ़िवादी मानसिकता और कानूनी खामियों पर टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि हम सिर्फ इसे एक नजरिये से नहीं देख सकते है. हमें किसी एक जेंडर से कोई लगाव नहीं है. मेरी भी एक बेटी है और अगर वह भी इस स्थिति में है तो मुझे इसे व्यापक नजरिए से देखना होगा. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में देखकर क्या इतनी कमजोर सामग्री के साथ यहां दोषसिद्धि सुनिश्चित की जा सकती है? कोर्ट ने कहा कि यहम वास्तविक को नजरअंदाज नहीं कर सकते है. एक मात्र तथ्य यह है कि शादी नही हुई है.

बता दें कि हाल ही में जस्टिस सुधांशू धुलिया की बेंच ने धमकी और जबरदस्ती के जरिए संबंध बनाने का आरोप विश्वसनीय नहीं है. अदालत ने कहा था कि यदि कोई वादा किया गया था तो वह पहले शारीरिक संबंध के बाद था और बाद में भी आरोप बिना किसी सहमति के जबर्दस्ती संभोग करने का था.

तीन मामलों में आरोप था कि संभोग धमकी और जबरदस्ती पर किया गया था. पीड़िता की ओर से कोई सहमति नहीं बताई गई है. ऐसे में किसी वादे पर कोई प्रलोभन नहीं पाया जा सकता. धमकी और जबर्दस्ती से यौन संबंध बनाने का आरोप भी विश्वास करने योग्य नहीं हैं, क्योंकिं दोनों पक्षों के बीच संबंध स्वीकार किए गए हैं.

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-भारत एक्सप्रेस 



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