सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना काल के दौरान प्राइवेट स्कूलों द्वारा लिए गए अधिक फीस के मामले में एक कमेटी का गठन किया है. मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले में तथ्यों और खातों की जांच जरूरी है. जिसके लिए दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस जीपी मित्तल और आदिश मेहरा की सदस्यता वाली एक कमेटी का गठन किया है.
कमेटी खातों की जांच करेगी और संबंधित अवधि के दौरान स्कूलों की वित्तीय स्थिति के बारे में चार महीने में सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट देगी. साथ कोर्ट ने स्कूलों को आदेश दिया है कि कमेटी के सामने अपेक्षित बिल प्रस्तुत करें. पिछली सुनवाई में कोरोना काल के दौरान प्राइवेट स्कूलों द्वारा लिए गए अधिक फीस को वापस करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया था.
स्कूल फेडरेशन ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
बता दें कि कोरोना काल के दौरान शैक्षणिक सत्र 2020-21 में वसूली फीस में से 15 फीसदी वापस करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाले उत्तर प्रदेश के निजी स्कूलों से सुप्रीम कोर्ट ने बैलेंस शीट तलब की थी. साथ ही कोर्ट ने कहा था कि बैलेंस शीट से पता चलता है कि हाई कोर्ट का आदेश सही था. ऐसे में स्कूलों को वसूली गई फीस का 15 फीसदी ही रखने का अधिकार होगा.
बाकी रकम अभिभावकों को लौटानी होगी. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूलों को 2020-21 शैक्षणिक वर्ष के दौरान ली गई कुल फीस का अगले सत्र में समायोजन करने का निर्देश दिया था. इसके साथ ही यह भी निर्देश दिया था कि जो छात्र स्कूल छोड़ चुके हैं, उन्हें 2020-21 सत्र के दौरान एकत्र की गई राशि का 15 प्रतिशत वापस करने को कहा था. इसके लिए स्कूलों को प्रक्रिया पूरी करने के लिए 2 महीने का समय दिया था. जिसके खिलाफ स्कूल फेडरेशन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
-भारत एक्सप्रेस
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