ऑपरेशन सिंदूर को लेकर टिप्पणी करने के मामले में गिरफ्तार अली खान को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई है. जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने अली को कुछ शर्तों के साथ अंतरिम जमानत दे दिया है. कोर्ट ने अली को सोनीपत के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के समक्ष पासपोर्ट सरेंडर करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने हरियाणा के डीजीपी को जांच के लिए एक तीन सदस्यीय एसआईटी के गठन का आदेश दिया है.
कोर्ट ने 24 घंटे के भीतर एसआईटी के गठन का दिया आदेश
कोर्ट ने डीजीपी से 24 घंटे के भीतर एसआईटी के गठन का आदेश दिया है. जिसमें तीन आईपीएस अधिकारी शामिल होंगे जो हरियाणा या दिल्ली से न हो. कोर्ट ने यह भी कहा कि एसआईटी में एक महिला अधिकारी को शामिल किया जाए. कोर्ट ने कहा कि दो कथित आपत्तिजनक पोस्ट की सामग्री को देखते हुए जांच पर रोक लगाने की आवश्यकता नहीं है.
अली के खिलाफ दर्ज की गई दो अलग-अलग FIR
एक निजी यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खानमहमूदाबाद को भाजपा युवा मोर्चा के एक नेता की शिकायत पर दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित उनके निवास से गिरफ्तार किया गया है. जिसके बाद कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया. अली के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं. एक जठेड़ी गांव के सरपंच एवं भाजपा युवा मोर्चा के सदस्य योगेश जठेड़ी ने राई थाने में दर्ज कराई है. जबकि दूसरी राज्य महिला आयोग की तरफ से डीजीपी को शिकायत दी गई थी.
महिला आयोग ने एक मंत्री के खिलाफ की थी मुकदमा दर्ज करने की मांग
राज्य महिला आयोग ने मध्य प्रदेश में एक मंत्री के खिलाफ हाई कोर्ट के टिप्पणी का हवाला देकर महमूदाबाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी. महिला आयोग ने अली खान द्वारा की गई टिप्पणी को स्वतः संज्ञान लेते हुए सोनीपत की अशोका यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर को 48 घंटे में दफ्तर में पेश होने को कहा था. महमूदाबाद ने दोनों सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ सेना के नियमों पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.
अली खान ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर की थी टिप्पणी
अली खान ने सोशल मीडिया पर ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित टिप्पणी करते हुए महिला सैन्य अधिकारियों कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की भूमिका को नकरात्मक रूप से प्रस्तुत किया. राज्य महिला आयोग का कहना था कि उनके बयानों में नरसंहार, अमानवीयता और पाखंड जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए भारतीय सेना एवं सरकार की मंशा पर साम्प्रदायिक दुर्भावना से प्रेरित आरोप लगाए गए.
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