सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के प्रतिष्ठित होटल आईटीसी मौर्य को एक मॉडल का खराब हेयरकट को लेकर राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण अधिनियम (एनसीडीसीआर) फैसले को पलट दिया है. जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने एनसीडीसीआर फैसले को आंशिक रूप से पलट दिया है.
2 करोड़ मुआवजे का आदेश
एनसीडीसीआर ने आईटीसी मौर्य को एक मॉडल का खराब हेयरकट के लिए 2 करोड़ रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था. जिसके खिलाफ होटल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसकी याचिका पर सुनवाई के बाद 2 करोड़ रुपए की मुआवजे की राशि को घटा कर 25 लाख रुपए कर दिया है. यह राशि मॉडल को पहले ही जारी कर दिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मुआवजा केवल अनुमानों या शिकायतकर्ता की सनक और इच्छाओं के आधार पर नही दिया जा सकता. विशेष रूप से जब दावा करोड़ों रुपए का हो तो हर्जाना साबित करने के लिए विश्वसनीय सबूत पेश किए जाने चाहिए.
लापरवाही और खराब सर्विस का हवाला
दरअसल, साल 2018 में मॉडल आशना रॉय दिल्ली के आईटीसी मौर्य होटल के सैलून में बाल कटवाने गई थी. लेकिन हेयरकट से वह संतुष्ट नहीं हुई. उन्होंने लापरवाही और खराब सर्विस का हवाला दिया. उन्होंने दावा किया कि उनकी खराब हेयरकट से उनकी प्रोफेशनल छवि और आत्मविश्वास प्रभावित हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि खराब हेयरकट से मॉडलिंग और फिल्मी अवसरों का नुकसान हुआ.
सेवा में कमी का आरोप
इसके बाद उन्होंने मुआवजे की मांग को लेकर उपभोक्ता फोरम का रुख किया और सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए लिखित माफी के साथ-साथ उत्पीड़न, अपमान और मानसिक आघात के लिए 3 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग की. सितंबर 2021 में एनसीडीसीआर ने आईटीसी को सेवा में कमी का दोषी पाया और रॉय को 2 करोड़ रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया. होटल ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. जिसपर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है.
ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया की समय सीमा को सुप्रीम कोर्ट ने एक सप्ताह के लिए बढ़ाया
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




