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अदालतें वकीलों के लिए नहीं, वादियों के लिए हैं- सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट स्थानांतरण याचिका की खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम से अवनीगड्डा कोर्ट स्थानांतरण के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी. सीजेआई बी आर गवई ने कहा कि अदालतों का उद्देश्य वकीलों नहीं, बल्कि वादियों की सेवा करना है.

Supreme Court
Edited by Radha Priya
Supreme Court ने आंध्र प्रदेश में एक अदालत के स्थानांतरण के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है. सीजेआई बी आर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अदालतें वकीलों के लिए नहीं, वादियों के लिए होती है. उनका मूल उद्देश्य वादियों को न्याय देना है. हम दरवाजे पर न्याय और ग्राम न्यायलय की बात करते हैं, वकील हमेशा इसका विरोध करते हैं.

सीजेआई गवई ने यह टिप्पणी मछलीपट्टनम बार एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की है. सीजेआई की इस टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका को वापस ले लिया. दायर याचिका में मछलीपट्टनम के छठे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय को मछलीपट्टनम से अवनीगड्डा स्थानांतरित करने को चुनौती दी गई थी.

वादियों की सुविधा के लिए कोर्ट का स्थानांतरण उचित: HC

बता दें कि इससे पहले आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दायर की गई थी, जिसपर हाई कोर्ट ने दौरान दौरान टिप्पणी करते हुए कहा था कि न्यायपालिका का तंत्र मूल रूप से वादियों के लाभ के लिए है. उनकी सुविधा और चिंताओं को ध्यान में रखकर ही अदालतों के स्थानांतरण जैसे फैसले लिए जाते है.

हाई कोर्ट ने कहा कि वह मछलीपट्टनम से अवनीगड्डा कोर्ट स्थानांतरण से वकीलों को कुछ असुविधा हो सकती है, लेकिन यह कदम वादियों के व्यापक हित में है. हाई कोर्ट ने साफ किया था कि अवनीगड्डा क्षेत्र के लोगों को अब हर तारीख पर लंबी दूरी तय नही करनी पड़ेगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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