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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: फांसी बनी रहेगी, घातक इंजेक्शन की मांग खारिज

Supreme Court Hearing: सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा काट रहे दोषियों के लिए फांसी के बजाय घातक इंजेक्शन या अन्य वैकल्पिक तरीकों को अपनाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार इस प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा करना चाहती है…..

मैरिटल रेप पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई.

भारत में वैवाहिक दुष्कर्म की संवैधानिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई, जिसमें केंद्र और राज्यों के रुख पर फैसला होना है. (PC: भारत एक्सप्रेस)

Edited by Shubhra Rai

Supreme Court Hearing: सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा काट रहे कैदियों के लिए फांसी की जगह घातक इंजेक्शन जैसे तरीकों को अपनाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. दायर याचिका में कहा गया था कि फांसी देना सजा-ए-मौत देने का एक दर्दनाक तरीका है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह फैसला सुनाया है.

1 जनवरी 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर केंद्र सरकार मौत की सजा देने के तरीके की व्यापक समीक्षा करना चाहती है और इसके लिए कोई दूसरा तरीका अपनाना चाहती है तो यह फैसला उसके रास्ते मे अड़चन पैदा नहीं करेगा. कोर्ट सभी दायर याचिका पर सभी पक्षो की जिरह के बाद 1 जनवरी 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था. यह याचिका वरिष्ठ वकील ऋषि मल्होत्रा की ओर से दायर किया गया था.

समय के साथ बदलाव जरूरी

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया था कि सरकार ने इस मुद्दे पर विचार करने के लिए एक कमेटी गठित की है. जो वैकल्पिक तरीको पर अध्ययन कर रही है. सरकार ने स्पष्ट किया था कि फिलहाल फांसी को सबसे तेज और सुरक्षित तरीका माना जा रहा है, इसलिए इसे बदलने के पक्ष में नहीं है. कोर्ट ने केंद्र के इस रुख पर नाराजगी जताई और कहा था कि समय के साथ बदलाव जरूरी है, लेकिन सरकार इसमें तैयार नहीं दिख रही.

कोर्ट ने कहा था कि,

भारतीय संविधान दयालु और जीवंत है. जिससे सम्मानजनक मौत का अधिकार भी शामिल होना चाहिए. दायर याचिका में मौत की सजा पाए दोषियों को फांसी देने के वैकल्पिक तरीके की मांग की गई थी. याचिकाकर्ता की दलील थी कि फांसी देना मौत की सजा को अंजाम देने का एक दर्दनाक तरीका है. याचिकाकर्ता ने कहा गया था फांसी की जगह घातक इंजेक्शन, फायरिंग स्क्वाड, बिजली की कुर्सी या गैस चैंबर जैसे तरीकों को अपनाया जाए. याचिकाकर्ता की दलील थी कि इन तरीकों से मौत कुछ ही मिनटों में हो जाती है, जबकि फांसी में काफी समय लग सकता है, जबकि फांसी में काफी समय लग सकता है और यह क्रूर और दर्दनाक हो सकती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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