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सुप्रीम कोर्ट ने ऑल इंडिया बार परीक्षा के 3500 रुपये शुल्क पर याचिका खारिज की, जानें क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने ऑल इंडिया बार परीक्षा के लिए 3500 रुपये शुल्क को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि बार काउंसिल के संचालन के लिए शुल्क जरूरी है और याचिकाकर्ता पहले बीसीआई को ज्ञापन दे सकता है.

All India Bar Exam

सुप्रीम कोर्ट ने ऑल इंडिया बार परीक्षा के लिए 3500 रुपए शुल्क लिए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर खारिज कर दिया है. जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी करते हुए याचिकाकर्ता से कहा कि आप चाहते हैं कि बार काउंसिल बची रहे या नहीं? कोर्ट ने कहा कि हम पहले ही ऊपरी और निचला अंग काट दिया है. उनके पास भुगतान करने के लिए कर्मचारी भी है. एक बार जब आप 3500 रुपये का भुगतान कर देंगे तो आपको 3 लाख 50 हजार की कमाई भी होने लगेगी.

याचिकाकर्ता जो पेशे से वकील है ने कहा कि बीसीआई 3500 रुपये चार्ज कर रही हैं. जबकि नामांकन शुल्क के अलावा कोई अन्य शुल्क नहीं ले सकती है. याचिकाकर्ता ने कहा कि यह अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 19 का उल्लंघन है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वो इसके लिए बीसीआई को ज्ञापन दे. कोर्ट ने कहा कि वो दोबारा कोर्ट आ सकता है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि राज्य बार काउंसिल एडवोकेट्स एक्ट में दिए प्रावधान से ज्यादा राशि नही ले सकते.

याचिकाकर्ता की दलील

एक्ट की धारा 24 में सामान्य वर्ग के लिए 750 और एससी/एसटी के लिए 125 रुपये की एनरोलमेंट फीस दी गई है. लेकिन हर राज्य में बार काउंसिल 15 से 45 हजार तक फीस ले रहे थे. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि विधिक शुल्क के नाम पर अत्यधिक शुल्क वसूलना युवा अधिवक्ताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. सीजेआई ने अपने फैसले में कहा था कि नामांकन के लिए पूर्व शर्त के रूप में कमजोर वर्गों से संबंधित लोगों के लिए उनके पेशे को आगे बढ़ाने में बाधाएं पैदा करता है.

कोर्ट ने कहा था कि व्यक्ति की गरिमा में व्यक्ति के अपनी क्षमता को पूरी तरह से विकसित करने का अधिकार शामिल है. किसी पेशे को अपनाने का अधिकार व्यक्ति की गरिमा का अभिन्न अंग हैं. नामांकन के लिए पूर्व शर्त के रूप में अत्यधिक नामांकन और विविध शुल्क वसूलना कानूनी पेशे में प्रवेश में बाधा उत्पन्न करता है. देश के कई राज्यों में विधि स्नातकों ने याचिका दायर की थी. याचिका में कहा गया था कि कई राज्य बार मे पंजीकरण के लिए भारी-भरकम फीस ले रहे है. अत्यधिक पंजीकरण शुल्क वसूलना कानून का उल्लंघन है और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए.

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-भारत एक्सप्रेस 



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