सुप्रीम कोर्ट ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसख्यकों पर हो रहे हिंसा को रोकने के निदेश देने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि दूसरे देश के मामले में हम आदेश कैसे दे सकते है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील मुकुल रोहतगी से सरकार के पास जाने को कहा है. जिसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकिल मुकुल रोहतगी ने याचिका को वापस ले लिया है.
यह याचिका भगवान जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव कमेटी के चेयरमैन और इस्कॉन मंदिर स्टीयरिंग बोर्ड के उप चेयरमैन व अधिवक्ता राजेश ढांडा ने दायर की थी. याचिका में केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया था कि वह बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों में मान्यता प्राप्त कूटनीतिक या अन्य कदम उठाए. याचिका में कहा गया था कि वर्तमान दौर में कई संप्रभु राष्ट्रों ने वैश्विक मंचों जैसे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय और संयुक्त राष्ट्र का उपयोग करके अन्य संप्रभु राष्ट्रों में मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मुद्दों को उठाया है.
याचिका में आरोप लगाया था कि विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने बांग्लादेश में अल्पसख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कोई भी ठोस कदम नहीं उठाए है. याचिका में बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसख्यकों पर बढ़ते अत्याचारों को रोकने के और नागरिक संशोधन अधिनियम 2019 के तहत आवेदन की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की गई थी. याचिका में यह भी कहा गया था कि बांग्लादेश में हाल ही में राजनीतिक उथल-पुथल के चलते अल्पसख्यकों पर हिंसा, हत्या, अपहरण और संपत्तियों की जबरन छीना झपटी जैसी घटनाएं बढ़ी है, जिससे कई हिंदू भारत में शरण लेने को मजबूर हो गए है. ऐसे में सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने की समय सीमा बढ़ाई जानी चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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