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पंजाब निकाय चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट की सख्त फटकार, बैलेट पेपर के खिलाफ याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने याचिकाकर्ता रुचिरा गर्ग को चुनाव से ठीक एक दिन पहले अदालत आने पर कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि इस चरण में पूरी चुनाव प्रक्रिया को बाधित नहीं किया जा सकता.

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब राज्य चुनाव आयोग के बैलेट पेपर से स्थानीय निकाय चुनाव कराने की मांग को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने रुचिरा गर्ग को चुनाव से ठीक एक दिन पहले बेहद देरी से अदालत का रुख करने पर कड़ी फटकार लगाई है.

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि वह अब इस मोड़ पर चल रही पूरी चुनाव प्रक्रिया को अस्थिर या बाधित नहीं कर सकती हैं. कोर्ट ने कहा कि आप अच्छी तरह जानते थे कि राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव होने वाले हैं, क्योंकि इससे पहले भी इस विषय को लेकर अदालतों में कई लड़ाई लड़ी जा चुकी है.

मामले की सुनवाई के दौरान यवचिककर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि राज्य में निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराए जा रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने एडीआर मामले के अपने पिछले ऐतिहासिक फैसलों में स्पष्ट रूप से कहा था कि ईवीएम का इस्तेमाल ही चुनाव का मुख्य मानक होना चाहिए. कोर्ट ने चुनाव के दौरान एक पर्यवेक्षक नियुक्त करने की मांग को भी खारिज कर दिया है कि यह एक बहुत ही गंभीर हस्तक्षेप होगा और वे ऐसा बिल्कुल नहीं करेंगे.

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने याचिका की खारिज

इससे पहले पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने भी दायर याचिका को खारिज कर दिया था. हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि चुनाव कार्यक्रम 13 मई को ही जारी हो चुका था, नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 19 मई थी और अब केवल मतदान बाकी है. कोर्ट ने कहा था कि इस चरण में ईवीएम पर कोई आदेश पारित करना ठीक नही होगा. पंजाब में 8 नगर निगमों, 71 नगर काउंसिल और 2 नगर पंचायतों के चुनाव 26 मई को होंगे. नतीजे 29 मई को आएंगे.

याचिका में कहा गया था कि राज्य चुनाव आयोग ने बिना किसी वैधानिक संशोधन, विधायी मंजूरी या सार्वजनिक परामर्श के अचानक ईवीएम वीवीपैट प्रणाली छोड़कर बैलेट पेपर से चुनाव कराने का निर्णय लिया. याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह फैसला स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की संवैधानिक भावना के खिलाफ है तथा संविधान के अनुच्छेद 14, 19 (1)(क), अनुच्छेद 21 और 243 Z का उल्लंघन है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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