Bharat Express DD Free Dish

बंगाल SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- ‘कानून व्यवस्था संभालना सरकार का काम, किसी को भी न मिले धमकी’

पश्चिम बंगाल एसआईआर मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई सूर्यकांत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह सुनिश्चित हो और एसआईआर प्रक्रिया समयबद्ध, पारदर्शी और सुव्यवस्थित तरीके से पूरी की जाए.

पश्चिम बंगाल एसआईआर मामले में सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया है कि राज्य सरकार का कर्तव्य है कि कानून-व्यवस्था की कोई समस्या न हो. कोर्ट ने यह टिप्पणी चुनाव आयोग और हस्तक्षेपकर्ताओं द्वारा हिंसा की घटनाओं और बीएलओ को दी जा रही धमकियों की ओर ध्यान दिलाने के बाद कि है.

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ दो सप्ताह बाद इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. सीजेआई ने अपने आदेश में साफ कहा है कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी तरह सुव्यवस्थित, समयबद्ध और पारदर्शी होनी चाहिए और जिन लोगों के नाम किसी त्रुटि या विसंगति के कारण शामिल नहीं हो पाए हैं. उन्हें पूरा अवसरदिया जाना जरूरी है. अदालत ने राज्य सरकार को चुनाव आयोग को उसके कार्यों के निर्वहन हेतु पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराना चाहिए.

हर नागरिक को मिलेगा पूरा अवसर

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर अभ्यास सुचारू रूप से चले और समय पर पूरा हो. कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन लोगों के नाम किसी विसंगति के कारण शामिल नहीं हुए है, उन्हें पूरा अवसर दिया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि माता-पिता या दादा-दादी के विवरण में गड़बड़ी और छह से अधिक संतानों जैसी समस्याओं वाले लगभग 1.36 करोड़ व्यक्ति अब ग्राम पंचायत, ब्लॉक या वार्ड कार्यालय में आपत्ति दर्ज करा सकते हैं. कोर्ट ने कहा कि अधिकारी दस्तावेज जमा करने में सहायता करेंगे और यदि दस्तावेज संतोषजनक नहीं पाए गए तो सुनवाई की जा सकती है. इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति सूचना के अभाव में अपने अधिकारों से वंचित न रहे.

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि आम लोगों पर कितना दबाव और तनाव है एक करोड़.से अधिक लोगों को नोटिस भेज दिए गए हैं. मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि गांगुली, दत्ता जैसे नाम अलग-अलग तरीके से लिखे जाते हैं, इसी वजह से लोगों को नोटिस भेज दिए गए.

उन्होंने यह भी कहा कि कई मामलों में माता-पिता और बच्चे की उम्र में15 साल से कम का अंतर होने पर भी नोटिस भेजा गया है. इसपर जस्टिस बागची ने कहा कि 15 साल का उम्र का अंतर कैसे तार्किक गड़बड़ी हो सकता हैं? हमारे देश में छोटी उम्र में शादी हो जाती है.

ये भी पढ़ें: उन्नाव रेप मामले में दोषी कुलदीप सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका, पीड़िता के पिता की मौत मामले में जमानत याचिका खारिज

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read