सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को लेकर बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने सुपरनोवा रेजिडेंशियल टावर्स ईस्ट और वेस्ट को लेकर यह फैसला दिया है. कोर्ट ने जम्मू कश्मीर के रिटायर्ड चीफ एम एम कुमार की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है. यह कमेटी इस प्रोजेक्ट की देखरेख करेगी और सभी काम समय पर पूरा हो यह सुनिश्चित करेगी.
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस बागची की पीठ ने यह आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद 27 हजार फ्लैट खरीदारों को फ्लैट मिलने की उम्मीद जग गई है. समिति में दूसरे प्रमुख सदस्य अनूप कुमार मित्तल हैं, जो एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड के पूर्व सीएमडी रह चुके है. उन्हें बड़े और संकटग्रस्त हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा कराने का व्यापक अनुभव है. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह कमेटी तत्काल प्रभाव से अंतरिम समाधान पेशेवर, लेनदेन की समिति और सुपरटेक के निलंबित निदेशक मंडल की जगह लेगी और परियोजना के शेष कार्य को पूरा कराएगी.
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह व्यवस्था लागू की है. सुपरटेक पर बैंक का हजारों करोड़ रुपए का कर्ज था. साल 2021-22 में कंपनी को दिवालिया प्रक्रिया में डाल दिया गया. जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुचा था. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि खरीदारों की रजिस्ट्री को प्राथमिकता दी जाएगी. परियोजना से प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग पहले निर्माण कार्यों को पूरा करने में होगा. इसके बाद बैंकों का कर्ज चुकाया जाएगा.
इन सभी के बाद यदि कोई राशि शेष रहती है तो प्राधिकरण का बकाया चुकाया जाएगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि प्राधिकरण के बकाया रजिस्ट्री में किसी तरह की बाधा नहीं बनेगा. सुपरनोवा एक मिक्स्ड यूज डेवलपमेंट है, जिसमें रेसिडेंशियल फ्लैट्स, ऑफिस स्पेस, रिटेल और लग्जरी होटल शामिल है.
यह प्रोजेक्ट करीब 70 हजार वर्ग मीटर जमीन पर बन रहा है और इसका अनुमानित लागत 2300 करोड़ रुपए से अधिक है. इंसल्वेंसी प्रक्रिया के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ था.
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-भारत एक्सप्रेस
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