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किसी को भी गिरफ्तार करने से पहले पुलिस को मानने होंगे यह 5 नियम, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी नियमों को सख्त बनाते हुए आदेश दिया है कि अब पुलिस को आरोपी को गिरफ्तारी की वजह लिखित में देनी होगी. वहीं, अगर नियम तोड़ा गया तो पुलिस अफसर पर विभागीय कार्रवाई होगी.

Supreme Court Strict Rules on Police Arrest Guidelines and Re-arrest Approval Bharat Express

बिना लिखित वजह गिरफ्तारी की तो नपेंगे पुलिस अफसर (AI IMAGE)

आमतौर पर लोगों को लगता है कि पुलिस किसी को भी जब चाहे उठाकर जेल में डाल सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है. देश का संविधान आम नागरिकों को कई अधिकार देता है. इसी कड़ी में सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी की पूरी प्रक्रिया को और पारदर्शी व सख्त बनाते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब पुलिस किसी भी आरोपी को सिर्फ मुंह जबानी बोलकर गिरफ्तार नहीं कर सकती. गिरफ्तारी की वजह उसे लिखित रूप में देनी होगी, और वह भी ऐसी भाषा में जिसे आरोपी आसानी से समझ सके.

लिखित वजह न देना पड़ेगा महंगा

जस्टिस उज्जवल भुयान और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 22(1) का हवाला देते हुए यह अहम फैसला सुनाया. अगर पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी का लिखित कारण दिए बिना पकड़ती है और इस गलती के कारण अदालत उस गिरफ्तारी को अवैध घोषित कर देती है, तो पुलिस अपनी गलती सुधारकर उसे दोबारा तुरंत गिरफ्तार नहीं कर पाएगी.

दोबारा गिरफ्तारी के लिए पुलिस को सबसे पहले संबंधित ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने अर्जी देनी होगी. पुलिस को मजिस्ट्रेट को यह समझाना होगा कि पहली बार लिखित वजह क्यों नहीं दी गई थी और अब आरोपी को दोबारा गिरफ्तार करना क्यों बेहद जरूरी है. मजिस्ट्रेट जब दोनों बातों से पूरी तरह संतुष्ट होंगे, तभी दोबारा गिरफ्तारी की इजाजत मिलेगी.

मनमानी की तो गिरेगी गाज

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सिर्फ आरोपियों के हक में ही नहीं है, बल्कि लापरवाह पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करता है. अगर किसी पुलिस अधिकारी की लापरवाही से गिरफ्तारी अवैध साबित होती है, तो उसके खिलाफ तुरंत विभागीय जांच शुरू होगी. जांच में दोषी पाए जाने पर अधिकारी के सर्विस रिकॉर्ड में यह प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की जाएगी.

बदल दिए जाएंगे जांच अधिकारी

फैसले की सबसे खास बात यह है कि अगर किसी मामले में आरोपी को दोबारा गिरफ्तार करने की नौबत आती है, तो उस केस की आगे की जांच पुराना अधिकारी नहीं करेगा. वरिष्ठ अधिकारियों को जांच किसी दूसरे निष्पक्ष पुलिस अफसर को सौंपनी होगी.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से साफ है कि अब पुलिस को गिरफ्तारी के समय 5 अहम कड़ियों का पालन करना ही होगा. लिखित कारण देना, गलती की वजह बताना, सीनियर अफसर से मंजूरी लेना, मजिस्ट्रेट से दोबारा गिरफ्तारी की इजाजत लेना और नया जांच अधिकारी तैनात करना.

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-भारत एक्सप्रेस



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