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एसिड अटैक पीड़िता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, कोर्ट ने कहा- ‘आरोपियों की संपत्ति नीलाम कर पीड़ितों को मुआवजा क्यों न दिया जाए?’

सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक मामलों में कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से रिपोर्ट मांगी और पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए आरोपियों की संपत्ति नीलाम करने का सुझाव दिया है.

CJI SURYAKANT

एसिड अटैक के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए केंद्र सरकार से पूछा है कि ऐसे जघन्य अपराधों को रोकने के लिए कड़ा सजा का प्रावधान जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा की विशेष कानून पर विचार करना चाहिए.

कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा है कि आरोपियों की पूरी संपत्ति नीलाम कर एसिड अटैक पीड़ितों को मुआवजा क्यों न दिया जाए. कोर्ट ने केंद्र सरकार और देश के सभी राज्य सरकारों से विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है. कोर्ट ने वर्षवार रिपोर्ट देने को कहा है. जिसमें कितने मामले दर्ज है, कितनों मामलों में चार्जशीट दाखिल हुई है, कितने में नही, कितने मामले लंबित है और कितने मामलों का अभी तक निपटारा किया गया है, पीड़ितों की योग्यता, वैवाहिक स्थिति और रोजगार से संबंधित जानकारी. कितने ऐसी एसिड पीड़िता है, जिन्हें एसिड पिलाया गया है.

कोर्ट ने तेज ट्रायल पर जोर दिया

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुझाव दिया है कि दहेज मृत्यु जैसे प्रावधानों की तर्ज पर कानून बनाया जाए, जिसमें आरोपी पर दोष साबित करने पर जोर दिया जाना चाहिए. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा है कि कोर्ट यह सुनिश्चित करेगी कि शाहीन को हाई कोर्ट में अपना केस लड़ने के लिए सर्वश्रेष्ठ वकील मिले. मामले की सुनवाई के दौरान शाहीन मलिक ने अदालत को बताया कि मैं 26 साल की थी जब मुझ पर हमला हुआ. अब 42 साल की हो चुकी हूं. अपने जीवन के अहम 16 साल इस केस में गंवा दिए, लेकिन आज भी न्याय नहीं मिला. 16 साल बाद भी पूरा नहीं हुआ ट्रायल इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को शाहीन के मामले की सुनवाई तेज करने का निर्देश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने लंबित हाई कोर्ट मामलों पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के सभी हाई कोर्ट्स में लंबित मामलों पर चिंता जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट और कोलकाता हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा दिए गए रिपोर्ट पर चिंता जताई है. कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट्स को ऐसे मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए विशेष कदम उठाने चाहिए. यह याचिका शाहीन मलिक जो खुद एसिड पीड़िता है, उनकी ओर से दायर की गई है. सीजेआई ट्रायल में 16 साल की देरी पर सूर्यकांत ने कहा था कि न्याय व्यवस्था का कितना मजाक है, यह बहुत शर्मनाक है. 2009 का ट्रायल अभी चल रहा है. अगर राष्ट्रीय राजधानी इसे नहीं संभाल सकती तो कौन संभालेंगे? इतना ही नही कोर्ट ने देश मे सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार से अदालतों में लंबित ट्रायल से संबंधित जानकारी मांगी है.

साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार और रराज्य सरकारों से कहा था कि इस तरह की पीड़िताओं को लेकर विधेयक लाए.

मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता ने कोर्ट को बताया था कि उसपर 2009 में एसिड अटैक हुआ था, लेकिन 2013 तक कुछ नही हुआ. इसपर कोर्ट ने पीड़िता को स्पीडी ट्रायल के लिए अर्जी दाखिल करने को कहा है. कोर्ट ने कहा था कि यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक दिन मामले में सुनवाई हो. सुनवाई के दौरान पीड़िता ने कोर्ट को बताया था कि जब न्याय पाने की उम्मीद टूट चुकी थी, उसी दौरान हिसार फैमिली कोर्ट के सीजेएम परमिंदर कौर ने केस को दोबारा ओपन करवाया, उसके बाद से न्याय की उम्मीद जगी और अब मैं एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए काम करती हूं.

आरोपियों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं- CJI सूर्यकांत

पीड़िता की मांग है कि जिस तरह से एसिड अटैक पीड़ितो को दिव्यांगता का दर्जा दिया जाता है. उसी तर्ज पर एसिड पीने के लिए मजबूर करने वाली पीड़िताओं को भी दिव्यांगता का दर्जा मिलना चाहिए. उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया था कि जबरन एसिड पीने के लिए मजबूर महिलाएं चल नही सकती है, कृत्रिम नली के जरिए फूड दिया जाता है. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि हमें इसे एक विकलांगता के रूप में देखना चाहिए. उन्होंने कहा था कि आरोपियों के साथ भी ऐसी ही निर्दयता से पेश आना चाहिए. इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि बिल्कुल ऐसे आरोपियों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए.

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-भारत एक्सप्रेस



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