Gyanvapi Case: सुप्रीम कोर्ट ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 2 सप्ताह बाद सुनवाई करेगा. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह निर्देश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि अभी तक इस मामले में एएसआई ने जवाब दाखिल नही किया है. लिहाजा जल्द जवाब दाखिल करने का निर्देश दे.
कोर्ट ने कहा मामले में दो सप्ताह बाद सुनवाई करेगा. इसी मामले में एक अर्जी दाखिल की गई है, जिसमें सावन में पूजा करने की अनुमति देने की मांग की गई है. यह याचिका हिंदू पक्ष की ओर से दायर की गई है. दायर याचिका में हिंदू पक्ष ने सावन के पवित्र महीने में ज्ञानवापी परिसर के.सील किए गए इलाके में मौजूद कथित शिवलिंग की पूजा, दर्शन और जल अभिषेक करने की अनुमति मांगी गई है.
सीलबंद क्षेत्र में सीमित दायरे में पूजा की अनुमति की अपील
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि अगर अदालत शर्तो के साथ पूजा की अनुमति देता है, तो उन सभी दिशा निर्देशों का पालन किया जाएगा. दायर याचिका में कहा गया है कि सावन भगवान शिव की आराधना का सबसे महत्वपूर्ण महीना.माना जाता है. ऐसे में सीलबंद क्षेत्र में मौजूद कथित शिवलिंग के दर्शन, पूजा और जलाभिषेक की अनुमति दी जाए याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया है कि यह पूजा पूरी तरह से सीमित दायरे में होगी और इससे कानून-व्यवस्था या अदालत के किसी भी पिछले आदेश का उल्लंघन नहीं होगा. 15 मई 2022 को वाराणसी अदालत के आदेश पर हुए एडवोकेट कमिश्नर के सर्वे के दौरान वजूखाने में एक विशेष संरचना मिली थी. हिंदू पक्ष ने इसे आदि विशेश्वर का प्राचीन शिवलिंग करार दिया था, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसे वजूखाने का पुराना फव्वारा बताया था.
बता दें कि व्यास जी के परिवार का दावा रहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद के बेसमेंट में उनके पास तहखाना था और उसमें पूजा होती रही है. व्यास जी के परिवार के मुताबिक 1993 में जब ज्ञानवापी मस्जिद को तीन तरफ से बाड़बंदी कर घेर दिया गया, तो तहखाने में पूजा बंद हो गई. व्यास जी के परिवार ने फिर से पूजा शुरू कराने के लिए वाराणसी के जिला जज के यहां मुकदमा दाखिल कर रखा था. वाराणसी के जिला जज रहे डॉक्टर अजय कृष्ण विशेश्वर ने रिटायर्ड होने से पहले फैसला दिया था कि व्यास जी के तहखाने में पूजा कराई जाए. इसके बाद वाराणसी जिला प्रशासन ने उसी रात से व्यास जी के तहखाने में पूजा की शुरुआत करा दी थी.
इतिहास को लेकर दोनों पक्षों के विरोधाभासी दावे
गौरतलब है कि काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद का विवाद काफी हद तक अयोध्या विवाद जैसा ही है. हालांकि, अयोध्या के मामले में मस्जिद बनी थी और इस मामले में मंदिर- मस्जिद दोनों ही बने हुए है. काशी विवाद में हिंदू पक्ष का कहना है कि 1669 में मुगल शासक औरंगजेब ने यहां काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़फोड़ ज्ञानवापी मस्जिद बनाई थी. हिंदू पक्ष के दावे के मुताबिक, 1670 से वह इसे लेकर लड़ाई लड़ रहा है.
हालांकि, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यहां मंदिर नहीं था और शुरुआत से ही मस्जिद बनी थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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