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‘सिर्फ कागजी प्लान से क्या फायदा?’ उत्तराखंड में जंगल की आग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिए बड़े निर्देश

उत्तराखंड के जंगलों में भीषण आग के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए विभाग के भीतर मजबूत लोकल सिस्टम बनाने की वकालत की है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट में 5 साल बाद मामले आने से न्याय में देरी होती है.

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Edited by Vaibhav Gupta

उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग के मामले में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि शुरुआत में यह कोशिश होनी चाहिए कि विभाग के अंदर ही एक मजबूत लोकल सिस्टम बनाया जाए. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट की निगरानी और देखरेख भी उतनी ही जरूरी है. समस्या यह है कि यहां बैठे-बैठे हमारे पास मामले पांच साल बाद आते हैं. तबतक रोक लग चुका होता है और कानूनी लड़ाई खिंचती रहती है.

घटनाओं को रोकने के लिए उठे ठोस कदम

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने कहा कि जंगल की आग एक प्राकृतिक घटना है जो कभी-कभी गर्मी, लोगों या जंगल माफिया की वजह से लगती है. मामले की सुनवाई के दौरान उत्तराखंड सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि 2023 में जंगल में 268 आग की घटनाएं घटी थी. जबकि इस साल 654 घटनाएं हुई हैं.

उन्होंने कहा कि आग की घटनाएं लगातार घट रही है. उन्होंने कहा कि आग की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम उठाए है. उन्होंने कहा कि ये आग आम तौर पर इसलिए लगती है क्योंकि जंगल की जमीन पर गिरी चीड़ की पत्तियां आग पकड़ लेती है. यह आग ज्यादा गर्मी की वजह से या इंसानी के दखल के वजह से लगी है.

उपायों से घटनाओं में आई कमी

सीजेआई ने कहा, हमने इन चीड़ की पत्तियों को पहले ही इकठ्ठा करना शुरू कर दिया है. अब इनका इस्तेमाल जंगल में रहने वाले लोगों और दूसरों के घरेलू इस्तेमाल के लिए अलग-अलग चीजे बनाने में किया जा रहा है. इन उपायों के वजह से जंगल की आग की घटनाओं में काफी कमी आई है.

उन्होंने कोर्ट को बताया कि लगभग 12 हजार कर्मचारी रेगुलर तौर पर फायर वाचर के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह तीन साल पहले की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा तैनाती है.

एक्शन न हो तो क्या फायदा?

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि आग तो लगेगी ही, लेकिन ऐसी घटनाओं को कम करने के लिए निश्चित रूप से एहतियात उपाय किए जा सकते है. इससे पहले एमिकस क्यूरी ने कहा था कि इस बाबत राष्ट्रीय स्तर पर एक्शन प्लान बना हुआ है, लेकिन समय पर एक्शन न हो तो सिर्फ प्लान का क्या फायदा?

उत्तराखंड सरकार ने सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट एक समिति बनाये और उस समिति में केंद्र सरकार को भी शामिल करें. जंगल की आग के कारण ब्लादियाखान, ज्योलीकोट, मंगोली, खुर्पाताल, देवीधुरा, भवाली, पिनस, भीमताल और मुक्तेश्वर सहित नैनीताल के आसपास के कई गांव प्रभावित हुए हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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