सुप्रीम कोर्ट 5 वर्षीय विधि पाठ्यक्रमों की समीक्षा के लिए कमेटी गठित करने की मांग वाली याचिका पर 20 अप्रैल को सुनवाई करेगा. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता व वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की मांग 20 अप्रैल की तारीख तय किया है.
क्या है मामला?
दरअसल, अश्विनी कुमार उपाध्याय ने सीजेआई के समक्ष मेंशन कर जल्द सुनवाई की मांग की. इसपर सीजेआई ने कहा कि पांच साल का कोर्स 1983 में आया था. इसे विशेष तौर पर पांच साल का रखा गया था. वहीं, वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कहा कि बाकी क्षेत्रों में यह कोर्स चार साल के है. उपाध्याय ने कहा कि मैंने पांच-छह वाइस चांसलर से उन्होंने बात की है. वहीं, पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, यूजीसी, लॉ कमीशन और बीसीआई को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.
बता दें कि यह याचिका अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर की गई है. दायर याचिका में 12 वीं के बाद बीटेक की तर्ज पर लॉ कोर्स को चार साल करने की मांग की गई है. जनहित याचिका में कहा गया है कि 12वीं के पांच साल का BALLB यानी लॉ कोर्स न्यू एजुकेशन पॉलिसी के खिलाफ है.
याचिका में क्या कहा गया?
दायर याचिका में कहा गया है कि नई शिक्षा नीति 2020 सभी व्यावसायिक और शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देती है, लेकिन बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा मौजूदा पाठ्यक्रम, पाठ्यक्रम और बैचलर ऑफ लॉ और मास्टर ऑफ लॉ पाठ्यक्रमों की अवधि की समीक्षा करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया.
इसमें कहा गया है कि बीए-एलएलबी और बीबीए-एलएलबी पाठ्यक्रमों की पांच वर्ष की अवधि पाठ्यक्रम सामग्री के अनुपात से अधिक है और लंबी अवधि के कारण छात्रों पर अत्यधिक वितीय बोझ पड़ता है.
इससे पहले, उसी याचिकाकर्ता ने कक्षा 12 के बाद 5 वर्षीय एलएलबी कोर्स को तीन वर्षीय कोर्स से बदलने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी. अप्रैल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था.
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-भारत एक्सप्रसे
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