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नीट में ट्रांसजेंडर्स के लिए आरक्षण को लेकर दायर याचिका पर अगले सप्ताह होगी सुनवाई

नीट-पीजी 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसजेंडर आरक्षण की मांग पर याचिका दाखिल की गई है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट के 2014 के नालसा फैसले के खिलाफ है, जिसमें ट्रांसजेंडरों को शैक्षिक और सामाजिक रूप से पिछड़ा वर्ग माना गया था.

Supreme Court
Edited by Radha Priya

सुप्रीम कोर्ट नीट में ट्रांसजेंडर के लिए आरक्षण की मांग वाली याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करेगा. सीजेआई बी. आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ सुनवाई कर रही है. मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई बी आर गवई ने कहा कि हम हर जगह सीटें लंबित नहीं रख सकते. आप कह रहे हैं कि अखिल भारतीय कोटे में नदो सीटें और राज्य कोटे में दो सीटें रिजर्व रखा जाए.

मामले की सुनवाई के दौरान याचिककर्ताओ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कोर्ट से कहा कि 2 सीटें रिजर्व रखने के लिए अंतरिम आदेश पारित करें. इसको लेकर तीन व्यक्तियों ने याचिका दायर की है. जिसमें से एक ने कोर्ट की अनुमति के बाद याचिका को वापस ले लिया है.

कोर्ट केंद्र सरकार, देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर जवाब मांग चुका है. पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा था कि नालसा मामले के फैसले के अनुसार उच्च चिकित्सा शिक्षा में ट्रांसजेंडरों के लिए आरक्षण है. यह याचिका तीन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की ओर से दायर की गई है.

ट्रांसजेंडर आरक्षण नीति के अभाव पर उठाए सवाल

याचिकाकर्ता पेशे से डॉक्टर हैं और जिन्होंने (नीट-पीजी) 2025 के संबंध में 16 अप्रैल के नोटिस और 17 अप्रैल के सूचना बुलेटिन को चुनौती दी है. याचिका में दावा है कि अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2014 के फैसले में दिए गए निर्देशों के उल्लंघन में जारी की गई थी, क्योंकि इसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से संबंधित आरक्षण की किसी योजना/नीति को रेखांकित नहीं किया गया है.

इससे पहले याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील इंदिरा जय सिंह ने दावा किया था कि यह अधिसूचना 2014 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के विपरीत जारी किया गया है, निसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए हौरिजेंटल आरक्षण की कोई योजना या नीति का उल्लेख नही किया गया है.

याचिका में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग गया था, इस आधार पर उन्हें शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिलना चाहिए.

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-भारत एक्सप्रेस



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