लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट से पता चलता है कि बातचीत तेजेंद्र सिंह और एक अज्ञात व्यक्ति के बीच हुई थी. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने जो ऑडियो क्लिप सौंपी है. वह अमनदीप सिंह और बलजिंदर सिंह के बीच की है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने जवाब में यह साफ कर दिया कि ट्रायल पर कोई रोक नही है. ट्रायल जारी रहेगा. जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले में 16 अप्रैल को अगली सुनवाई करेगी.
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि यदि आवश्यक हो तो गवाहों की सूची पर फिर से विचार करें और पहले चश्मदीद गवाहों या महत्वपूर्ण गवाहों की जांच की प्राथमिकता दें. कोर्ट ने बलजिंदर सिंह को पुलिस में शिकायत करने की अनुमति दे दी है. वही आशीष मिश्रा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने विरोध करते हुए कहा कि यह रिपोर्ट कोर्ट के लिए नहीं बल्कि प्रेस के लिए है.
उन्होंने यह भी कहा कि मेरे पिता सत्ता में नहीं है. मेरी बेटियां है, जिसपर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हमें सहानुभूति है, बच्चों को तकलीफ नहीं होनी चाहिए, लेकिन थोड़ा इंतजार करें. कोर्ट ने कहा कि अगर हमें आरोपों में कुछ दम लगता है, तो आप जानते है, जिसपर वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि बिल्कुल भी दम नहीं है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी के एसपी को आशीष मिश्रा की ओर से गवाहों को प्रभावित करने के आरोपों से संबंधित रिपोर्ट चार सप्ताह में देने को कहा था. पीड़ित परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आशीष मिश्रा की जमानत को रद्द करने की मांग की है.
पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?
पिछली सुनवाई में आशीष मिश्रा की ओर से पेश वकील ने कहा था कि तस्वीरों में आशीष मिश्रा नही है. कोर्ट ने आशीष मिश्रा के वकील से पूछा था कि आप अपनी बात हलफनामे पर क्यों नही कहते? जिसपर आशीष मिश्रा के वकील ने कहा था कि हर बार हमारे खिलाफ कोई न कोई अर्जी दाखिल कर दी जाती है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने आशीष मिश्रा की ओर से पेश वकील से कहा था कि जमानत शर्तो का सख्ती से पालन करना होगा.
वही पीड़ितों की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई को मिश्रा को जमानत दी थी. साथ ही जमानत की शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया था और उन्हें तय तारीख से केवल एक दिन पहले अपने मुकदमे के स्थान पर जाने की अनुमति दी थी. लेकिन वह एक अक्टूबर को (लखीमपुर खीरी) ऐसे गए जैसे दो अक्टूबर को राष्ट्रीय अवकाश वाले दिन सुनवाई हो, जबकि अगले दिन अदालत बंद थी और उन्होंने एक अक्टूबर को एक विशाल सार्वजनिक रैली को संबोधित किया.
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते समय आशीष मिश्रा पर कई शर्ते लगा रखा है. आशीष मिश्रा को रिहाई से एक सप्ताह के भीतर उत्तर प्रदेश छोड़ना होगा. वह यूपी, दिल्ली या दिल्ली एनसीआर में नही रह सकते है. उन्हें अदालत को अपने स्थान के बारे में सूचित करना होगा, कोर्ट ने पासपोर्ट सरेंडर करने, गवाहों को प्रभावित ना करने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ नही करने का आदेश दिया था.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.





