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क्या आप जानते हैं ब्रश से ज्यादा क्यों बेहतर है दातुन? किस महीने में किसका करें इस्तेमाल, फायदे जानकर चौंक जाएंगे आप

Datun Health Benefits: दांतों की सफाई के साथ पूरे शरीर के लिए दातुन को फायदेमंद माना जाता है. इसके लिए समय भी निर्धारित है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कौन सी दातुन सेहत के लिए फायदेमंद और कितना होना चाहिए दातुन का आकार. हम आपको बताते हैं.

Datun Health Benefits

Datun Health Benefits: आपने अधिकतर लोगों को टूथपेस्ट से ब्रश करते देखा होगा. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी है जो दातुन का भी इस्तेमाल करते हैं. दांतों की सफाई के साथ पूरे शरीर के लिए दातुन को फायदेमंद माना जाता है. इसके लिए समय भी निर्धारित है. कहा जाता है कि प्राकृतिक ब्रश का इस्तेमाल करना कई गुना फायदेमंद है. नीम, बबूल या अन्य टहनियों से बनी दातुन न केवल दांतों को स्वच्छ और चमकदार बनाती है बल्कि मसूड़ों की देखभाल भी करती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कौन सी दातुन सेहत के लिए फायदेमंद और कितना होना चाहिए दातुन का आकार. चलिए हम आपको बताते हैं.

कौन सी दातुन सेहत के लिए है फायदेमंद?

आयुव्रेद के अनुसार नीम, मदार समेत 12 ऐसे वृक्षों का नाम बताया है जिनके दातुन आप कर सकते हैं. इनके इस्तेमाल के लिए समय भी तय किया है. जिसमें चैत्र माह से लेकर गर्मी भर नीम, मदार या बबूल का दातुन करने के लिए बताया है. सर्दियों में अमरुद या जामुन तो वहीं बरसात के मौसम में आन या अर्जुन का दातुन करवे की सलाह दी जाती है.

नीम के दातुन के फायदे- (Neem Datun Ke Fayde)

महर्षि के ग्रंथ में वर्णित है कि नीम के दातुन को निरंतर नहीं किया जा सकता है. इसके लिए बीच में विराम देना आवश्यक है. तीन महीने लगातार करने के बाद मंजन या दूसरे दातुन का इस्तेमाल करना चाहिए. वृक्ष विशेष के रस न सिर्फ हमारे दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखते हैं, बल्कि शरीर के कई रोगों में भी राहत मिल सकती है. नीम के दातुन में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो दांतों पर जमी प्लाक और बैक्टीरिया को खत्म करते हैं. नीम के दातुन से मसूड़ों में सूजन और खून आने की समस्या को खत्म किया जा सकता है.

मुंह से आने वाली दुर्गंध भी दूर होती है. नीम की छाल में निम्बीन या मार्गोसीन नामक तिक्त तत्व और निम्बोस्टेरोल पाया जाता है. इसकी टहनी से निकले रस से मसूड़ों की सूजन, पायरिया, दांतों में कीड़ा लगना, आदि कष्ट दूर हो सकते हैं. अष्टांग हृदयम में वर्णित है कि यदि गर्भवती महिलाएं नीम की ताजी टहनियों की दातुन सुबह-शाम नियमित रूप से करती हैं, तो उसका गर्भस्थ शिशु निरोगी जन्म लेता है तथा उसे किसी भी प्रकार के रोग निरोधी टीकों को लगाने की आवश्यकता ही नहीं होती.

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बबूल के दातुन के फायदे

आयुर्वेद में बबूल की दातुन कफनाशक, पित्तनाशक, रक्त संबंधित अनेक समस्याओं को दूर करने वाला माना जाता है. बबूल के अंदर एक गोंद होता है, जिसमें पाए जाने वाले तत्व अतिसार, फेफड़े से संबंधित समस्याओं के साथ ही दांतों के असमय न गिरने देने, मसूड़ों से खून न निकलने, मुंह के छालों का रोकने का भी गुण होता है. ब्रह्मलीन पं. तृप्तिनारायण झा शास्त्री के अनुसार लगातार बबूल के दातुन को करते रहने से बांझपन एवं गर्भपात होने का भय नहीं रहता है.

अर्जुन की दातुन के फायदे

अर्जुन की टहनी क्रिस्टलाइन लेक्टोन युक्त होती है. यह रक्त, हृदय रोगों में राहत देने के साथ शारीरिक सुंदरता को बढ़ाने वाला होता है. इसकी ताजी टहनी से दातुन करने से हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, टीबी समेत अनेक बीमारियां खत्म हो सकती हैं.

बरगद की दातुन के फायदे

बरगद की दातुन में टैनिक नामक तत्व पाया जाता है, जो आंखों की रोशनी बढ़ाने वाला, गर्भावस्था में होने वाली समस्याओं के लिए रामबाण माना जाता है. ब्रह्मलीन पं. तृपिनारायण झा शास्त्री के अनुसार बरगद की टहनियों को लगातार दातुन करने से मुख और शरीर से संबंधित सभी समस्याएं खत्म हो जाती हैं. अपामार्ग की टहनी में क्षारीय गुण होता है. यह पथरी, श्वास रोग, त्वचा संबंधित रोगों का नाश करता है.

बेर के दातुन के फायदे

बेर की दातुन से मुंह की समस्याएं तो दूर होती ही हैं, साथ ही ये गले की खराश, अधिक मासिक स्राव संबंधी शारीरिक परेशानियों को भी दूर किया जा सकता है. इससे दांत के कीड़े, रक्त विकार, खांसी, मुंह से बदबू संबंधी समस्याएं दूर हो जाती हैं.

दातुन का आकार कैसा चाहिए होना चाहिए?

आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि दातुन लगभग 6-8 इंच लंबी होनी चाहिए तथा खूब महीन कूची बनाकर ही करनी चाहिए. यह सुबह शाम करना और भी फायदेमंद माना जाता है. दातुन करने के दौरान हमेशा उकड़ू (पांव के बल) बैठना चाहिए, जिससे दातुन का लाभ सभी अंग प्राप्त कर सकते हैं.

-भारत एक्सप्रेस 



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