Sanwalia Ji Temple Donation Record: चित्तौड़गढ़ के सुप्रसिद्ध श्री सांवलिया जी मंदिर में आस्था और विश्वास ने इस साल एक नया कीर्तिमान रचा है. वर्ष 2025-26 के दौरान मंदिर के भंडार में करीब 337 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जमा हुई है, जो पिछले 34 वर्षों में सबसे अधिक है. दिलचस्प बात यह है कि पिछले चार दशकों में ऐसा कोई साल नहीं रहा जब चढ़ावे में कोई कमी आई हो; हर साल भक्तों की संख्या के साथ दान की राशि भी बढ़ती ही जा रही है.
बिजनेस पार्टनरशिप का अनोखा करार
इस बढ़ते चढ़ावे के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प वजह है ‘साझेदारी’. यहां आने वाले भक्त ठाकुर जी को अपना आराध्य ही नहीं, बल्कि अपने कारोबार का ‘सेठ’ और ‘साझेदार’ मानते हैं. दानपात्र से हाल ही में कुछ ऐसे करारनामे निकले हैं, जो किसी कॉर्पोरेट डील से कम नहीं हैं.
एक भक्त ने तो बाकायदा स्टाम्प पेपर की तरह पत्र लिखकर वचन दिया है कि वह अपने शेयर बाजार और अन्य निवेशों से होने वाली आय (सैलरी को छोड़कर) का सीधा 10 प्रतिशत हिस्सा सांवरिया सेठ के नाम करेगा.
भक्त ने दी लिखित शर्तें
दानपात्र से निकले इस साझेदारी पत्र में भक्त ने अपनी श्रद्धा को बहुत ही व्यवस्थित तरीके से पेश किया है. पत्र में लिखा गया है कि तीन महीने में होने वाली आय का 10 प्रतिशत हिस्सा, अगली तिमाही शुरू होने के बाद महीने की 10 तारीख तक वह स्वयं मंदिर आकर अर्पित करेगा. यह आस्था का एक ऐसा अनूठा स्वरूप है जहां भक्त अपने व्यापारिक लाभ का श्रेय और हिस्सा सीधे अपने साझेदार भगवान को सौंप देता है. कई भक्त तो कंपनी के लेटरहेड पर अपना प्रॉफिट-लॉस स्टेटमेंट तक चढ़ा देते हैं.
ये भी पढ़ें- आज नारद जयंती पर खुलेंगे किस्मत के द्वार! भूलकर भी न करें ये काम, जानें राहुकाल की किस टाइमिंग ने बढ़ा दी है टेंशन?
65 लाख से 337 करोड़ का दान
मंदिर के विकास का सफर भी बड़ा हैरान करने वाला है. साल 1991-92 में जब पहली बार सरकारी ट्रस्ट के तहत गणना हुई थी, तब चढ़ावा मात्र 65 लाख रुपये था. लेकिन जैसे-जैसे व्यवस्थाएं सुधरीं, यह आंकड़ा बढ़ता गया.
आज स्थिति यह है कि दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान महज एक महीने में ही 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का चढ़ावा आ जाता है. इस पूरी राशि की गिनती के लिए करीब 200 लोगों की टीम लगती है और मशीनों की मदद से भी इसे गिनने में 5 से 10 दिन का वक्त लग जाता है.
दान की राशि से संवर रहे हैं 16 गांव
यह दान केवल मंदिर के खजाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जन-कल्याण में भी इस्तेमाल होता है. मंदिर प्रशासन मंडफिया सहित आसपास के 16 गांवों के विकास की जिम्मेदारी उठाता है. गाँवों में हाई मास्क लाइटें, पक्की सड़कें और सामुदायिक भवन इसी राशि से बनवाए जा रहे हैं. साथ ही, दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर परिसर में 180 कमरों की एक विशाल धर्मशाला का निर्माण भी युद्ध स्तर पर चल रहा है, जो अगले छह महीनों में बनकर तैयार हो जाएगी.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

