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संभल के कल्कि धाम में बहेगी भक्ति की बयार, ‘फूलों की होली’ के लिए तैयार दरबार

Kalki Dham Phoolon Ki Holi: कल 19 फरवरी को संभल का ऐंचोड़ा कंबोह गांव एक अलग ही रंग में रंगा नजर आएगा. श्री कल्कि धाम ‘फूलों की होली’ खेली जाएगी. यह दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर है जो भगवान विष्णु के उस अवतार के लिए बन रहा है.

Sambhal Kalki Dham Foundation Day Phoolon Ki Holi to be Celebrated on Feb 19 2nd Anniversary Acharya Pramod Krishnam
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

उत्तर प्रदेश के संभल स्थित प्रसिद्ध कल्कि धाम (ऐंचोड़ा कंबोह) एक बार फिर भक्ति और उत्सव के रंगों में सराबोर होने के लिए तैयार है. दिनांक 19 फरवरी 2026 (गुरुवार) को कल्कि धाम का ‘स्थापना दिवस समारोह’ और भव्य ‘फूलों की होली’ का आयोजन किया जा रहा है. इस धार्मिक उत्सव में शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है.

पीएम मोदी ने 2 साल पहले रखा था आधार

19 फरवरी का दिन श्री कल्कि धाम के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है. ठीक दो वर्ष पूर्व 19 फरवरी 2024 को पीएम मोदी ने अपने करकमलों द्वारा श्री कल्कि धाम का शिलान्यास किया था. इसी ऐतिहासिक दिन को याद करते हुए हर साल यहां स्थापना दिवस समारोह धूमधाम से मनाया जाता है. धाम के प्रवक्ता पंकज चाहल ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ 19 फरवरी 2026 को सुबह 11:30 बजे होगा. उन्होंने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से इस उत्सव में शामिल होने का आग्रह किया है.

भविष्य के अवतार की पीठ और ‘फूलों की होली’

श्री कल्कि धाम की मान्यता दुनिया भर में अद्वितीय है. यह एकमात्र ऐसी पीठ है जो भगवान विष्णु के भविष्य में होने वाले दसवें अवतार ‘श्री कल्कि’ पर आधारित है. यहां की होली भी खास होती है. यहां रंगों या कीचड़ की नहीं, बल्कि फूलों की होली खेली जाती है.

राष्ट्र निर्माण और सामाजिक एकता का उत्सव

इस उत्सव के दौरान श्रद्धालु कीर्तन और भजनों की धुन पर थिरकते हुए भगवान के विग्रह पर पुष्प वर्षा करते हैं. यज्ञादि अनुष्ठान किए जाते हैं, जिसमें भगवान कल्कि के शीघ्र अवतरण और विश्व कल्याण की कामना की जाती है. यह उत्सव न केवल भक्ति का, बल्कि राष्ट्र निर्माण और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है.

प्रेम और भाईचारे की पुरानी परंपरा

कल्कि धाम में होली का उत्सव हमेशा से ही प्रेम और भाईचारे का संदेश देता आया है. पिछले साल (2025) के आयोजन में पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भक्तों संग जमकर फूलों की होली खेली थी. उस दौरान उन्होंने संदेश दिया था कि होली प्रेम का उत्सव है और सच्चा प्रेम वह है जिसे छुपाया न जाए.

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धाम की परंपरा में हास्य-विनोद का भी विशेष स्थान है. पिछले आयोजनों में होली मिलन के दौरान ‘महामूर्खानंद’ और ‘महामूर्ख शिरोमणि’ जैसी मजेदार उपाधियां देने की परंपरा भी रही है, जो माहौल को खुशनुमा बना देती है. इस बार भी उम्मीद है कि भक्त “होली खेले रघुवीरा” और “होली आई रे कन्हाई” जैसे भजनों पर झूमते हुए नजर आएंगे.



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