बिहार दिवस पर विशेष: बिहार की बौद्धिक विरासत का जीवंत दस्तावेज है ‘नालंदा’
आज बिहार अपना स्थापना दिवस मना रहा है. इस अवसर पर पेंगुइन स्वदेश द्वारा प्रकाशित अभय के. की पुस्तक "नालंदा: विश्व चेतना का उद्गम स्थल" के जरिए जानिए उस महान विश्वविद्यालय के उत्थान, पतन और फिर से जीवित होने की पूरी कहानी.
‘पंख दिए आकाश न दोगे’; महाकवि कन्हैयालाल सेठिया की कविताओं में छिपी है आत्मनिर्भरता की गूंज | Book Review
आज विश्व कविता दिवस पर याद करते हैं राजस्थान के उस जनकवि को, जिनकी पंक्तियों में रेगिस्तान की तपन भी है और संवेदना की ठंडी छांव भी. पेंगुइन स्वदेश द्वारा प्रकाशित कन्हैयालाल सेठिया के प्रतिनिधि संग्रह 'पंख दिए आकाश न दोगे' की विशेष समीक्षा, जो हमें स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की नई उड़ान सिखाती है.
‘शिव से श्रोडिंगर’: डॉ. मृत्युंजय की पुस्तक ने खोले ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्य
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान शिव का 'स्पंदन' और क्वांटम फिजिक्स के 'वाइब्रेशन' में क्या संबंध है? डॉ. मृत्युंजय गुहा मजूमदार की नई पुस्तक 'शिव से श्रोडिंगर' प्राचीन कश्मीरी शैव दर्शन और आधुनिक विज्ञान के रहस्यों को एक साथ लाती है.
नैनन में आन-बान: स्वरों की आलापचारी में डूबती एक आत्मीय यात्रा
यतीन्द्र मिश्र की नई पुस्तक 'नैनन में आन-बान' शास्त्रीय संगीत की शुष्क व्याख्या नहीं, बल्कि सुरों की एक आत्मीय यात्रा है. यह किताब 12 महान संगीतकारों के जीवन और उनकी गायकी के जरिए पाठक को रागों की दुनिया से जोड़ती है.
‘साठ पार के सुपरस्टार’: रिटायरमेंट के अवसाद से निकलने और दूसरी पारी को जीने का मैन्युअल
विजय सिंह की पुस्तक "साठ पार के सुपरस्टार" रिटायरमेंट के बाद सक्रिय और सकारात्मक जीवन जीने का मंत्र देती है. अखबार बेचने से लेकर नेशनल सेल्स हेड तक का सफर तय करने वाले लेखक ने अपनी इस किताब में बताया है कि कैसे 60 के बाद की 'बोनस उम्र' को एक सुपरस्टार की तरह जिया जा सकता है.
देवव्रत से भीष्म तक: त्याग, संकल्प और वीरता की कालजयी गाथा
‘देवव्रत- कालजयी योद्धा की वीरगाथा’ केवल महाभारत के एक महान पात्र की कथा नहीं, बल्कि त्याग, वचनबद्धता और चरित्र की ऐसी गूढ़ व्याख्या है, जो पाठक के अंतःकरण को छू जाती है. प्रभात सिन्हा द्वारा रचित यह कृति भीष्म पितामह को दैवी नहीं, बल्कि संवेदनशील मनुष्य के रूप में प्रस्तुत करती है.
इलाहाबाद पैसेंजर: 90 के दशक के छात्र-जीवन का जीवंत दस्तावेज
यह उपन्यास उन संकरी गलियों और 75 पैसे वाली चाय की खुशबू की वापसी है, जहाँ भविष्य गढ़ा जाता था. 'इलाहाबाद पैसेंजर' महज़ एक कहानी नहीं, बल्कि 1990 के दशक के इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उस दौर की जीवंत धड़कन है.
कोशिकीय लय: सिद्धार्थ मुखर्जी की एक जीवंत वैज्ञानिक कथा
सिद्धार्थ मुखर्जी, पुलित्जर पुरस्कार विजेता लेखक और ऑन्कोलॉजिस्ट, अपनी किताबों से विज्ञान को आम पाठकों के लिए इतना रोचक बना देते हैं कि वह महज तथ्यों का संग्रह न रहकर एक भावनात्मक यात्रा लगने लगती है.
विनम्र विद्रोही: एक गणितीय जादूगर की त्रासदीपूर्ण यात्रा
हिंद पॉकेट बुक्स से प्रकाशित यह 242 पृष्ठों की पुस्तक, रामानुजन के जीवन को एक रोचक उपन्यास की तरह बुनती है, जिसमें गणित के सूत्रों की जादुई चमक के साथ-साथ सामाजिक बंधनों और व्यक्तिगत संघर्षों की कड़वाहट भी घुली हुई है.
दूरदर्शन: आधी आबादी की सशक्त गाथा, एक प्रेरणादायी विमर्श
संगीता अग्रवाल की नवीनतम पुस्तक दूरदर्शन: आधी आबादी की सशक्त गाथा (वाणी प्रकाशन, 2025) न केवल भारत के लोक प्रसारक माध्यमों के इतिहास को उजागर करती है, बल्कि उन अदृश्य नायिकाओं की अनकही कहानियों को भी सामने लाती है.







