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CJI BR Gavai

CJI Gavai Jagdish Gupta Tribute: CJI गवई ने कहा कि दोनों वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्र में ऐसा योगदान दिया है जिसकी छाप लंबे समय तक बनी रहेगी. उन्होंने दोनों परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि बार और बेंच ने दो महत्वपूर्ण स्तंभ खो दिए हैं.

NALSA के कार्यक्रम में CJI गवई ने कानूनी सहायता को मात्र 'दान' नहीं, बल्कि 'नैतिक कर्तव्य' बताया और नीतिगत निरंतरता के लिए सलाहकार समिति का सुझाव दिया. उन्‍होंने कहा- न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना शासन का हिस्सा है.

भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने SIFOCC के सत्र में शिरकत की. उन्‍होंने कहा- “कानून भरोसे का वास्तुकार बने. विकास और न्याय में संतुलन जरूरी है, रूल ऑफ लॉ पारदर्शिता की नींव होता है.”

CJI जस्टिस बीआर गवई ने आज राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) की कॉन्‍फ्रेंस में संबोधन दिया. उन्‍होंने कानूनी सहायता को गांधी जी की कुंजी बताते हुए गरीबों तक न्याय पहुंचाने पर जोर दिया. मणिपुर की बुजुर्ग महिला से जुड़ी भावुक यादें भी साझा कीं.

CJI B.R. Gavai Speech: SIFOCC के 6ठे पूर्ण सत्र में संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर देश के मुख्य न्यायाधीश गवई ने संबोधन दिया. उन्‍होंने कहा कि व्यावसायिक कानून, सेबी, मध्यस्थता, आईबीसी जैसे कानूनों ने देश में पारदर्शिता बढ़ाई.

सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों व मुवक्किलों को कानूनी सलाह देने वाले वकीलों को लेकर बड़ा फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया है कि सीबीआई, ईडी या पुलिस वकीलों से उनके क्लाइंट के बारे में सवाल नही कर सकती है.

भूटान की अपनी अधिकारिक यात्रा के दौरान  भारत के चीफ जस्टिस बीआर गवई (CJI BR Gavai) ने 25 अक्टूबर को भूटान के महामहिम राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और 24 अक्टूबर को प्रधानमंत्री दाशो त्शेरिंग तोबगे के साथ बैठकें कीं.

सीजेआई बी आर गवई पर एक वकील राकेश किशोर द्वारा जूता फेंकने से संबंधित दायर अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 27 अक्टूबर को सुनवाई करेगा. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ अवमानना याचिका पर सुनवाई करेगी. 

टान की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान CJI BR Gavai ने आज रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, थिम्पू में जिग्मे सिंग्ये वांगचुक (जेएसडब्ल्यू) स्कूल ऑफ लॉ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्य भाषण दिया.

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने प्रेसीडेंशियल रेफरेंस से जुड़े मामले में चार सप्ताह के भीतर फैसला सुनाने का संकेत दिया है. मामला राष्ट्रपति और राज्यपालों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है, जिस पर कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है.