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ISRO जल्द ही गगनयान मिशन के बाद आम लोगों के लिए भी अंतरिक्ष के दरवाजे खोल सकता है. अब सिर्फ पायलट ही नहीं, बल्कि साइंस और टेक्नोलॉजी से जुड़े लोग भी एस्ट्रोनॉट बनने का सपना पूरा कर पाएंगे.

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव जुड़ गया है. इस सफलता ने भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में ला दिया जो स्वदेशी तकनीक से अपने नागरिकों को अंतरिक्ष भेजने और वापस लाने की क्षमता रखते हैं.

ISRO का 'मिशन MITRA' लद्दाख की 3,500 मीटर की ऊंचाई पर अंतरिक्ष यात्रियों के आइसोलेशन और टीम वर्क का टेस्ट कर रहा है. गगनयान की सफलता के लिए जरूरी यह डेटा भविष्य के भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा.

भारत ने अंतरिक्ष में अपनी सुरक्षा ताकत को नई ऊंचाई देने का फैसला किया है. ‘स्पेस-बेस्ड सर्विलांस फेज-3’ मिशन के तहत 2029 तक 52 एडवांस मिलिट्री सैटेलाइट्स लॉन्च किए जाएंगे, जो AI, इंफ्रारेड और रडार तकनीक से लैस होंगे.

ISRO का इस साल का पहला मिशन 'PSLV-C62' फेल हो गया है. इस मिशन में प्राइमरी पेलोड Anvesha (EOS-N1) और 15 को-पैसेंजर सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में स्‍थापित किए जाने थे. हालांकि, मिशन के 8वें मिनट में गड़बड़ी हुई, और रॉकेट रास्‍ते से भटक गया.

ISRO PSLV-C62 Failure News: इसरो का साल 2026 का पहला मिशन रास्ता भटक गया है. रॉकेट के तीसरे चरण में खराबी आने से DRDO का जासूसी सैटेलाइट 'अन्वेषा' और 14 अन्य उपग्रह कक्षा से भटक गए. आइये जानें इसे लेकर इसरो प्रमुख वी नारायणन ने क्या कहा है?

ISRO LVM3 Launch: ISRO ने LVM3 रॉकेट से 6,100 किलोग्राम का सबसे भारी पेलोड लॉन्च किया. पीएम मोदी ने इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा में गौरवपूर्ण क्षण बताया और वैज्ञानिकों को बधाई दी.

ISRO Launches Bahubali LVM3 M6: 90 सेकंड की देरी और अंतरिक्ष में टक्कर का डर बना रहा लेकिन ISRO के 'बाहुबली' ने वो कर दिखाया जो मोबाइल नेटवर्क की दुनिया हमेशा के लिए बदल देगा.

इसरो 2026 में कुल सात अंतरिक्ष मिशन लॉन्च करने की योजना बना रहा है, जिनमें गगनयान कार्यक्रम से जुड़े कई महत्वपूर्ण परीक्षण शामिल हैं. इन मिशनों की सफलता भारत को दुनिया के चुनिंदा मानव अंतरिक्ष उड़ान करने वाले देशों की श्रेणी में खड़ा कर सकती है.

Vikram-I Rocket: भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-I' तैयार है. आज PM मोदी ने इसका अनावरण किया. स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा निर्मित यह 26 मीटर ऊंचा रॉकेट 300 किलोग्राम तक के सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंचाएगा.