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पृथ्वी से स्पेसक्राफ्ट के जरिए उड़ान भरकर भारतीय मूल के एक एस्ट्रोनॉट डॉ. अनिल मेनन (Anil Menon) अंतरिक्ष में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पहुंच गए. वहां उसने NASA की अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर के साथ 6 घंटे 27 मिनट तक सफलतापूर्वक 'स्पेस वॉक' (Spacewalk) किया.

India Space Station Mission: सरकार ने संसद में बताया कि भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) 2035 तक तैयार करने का लक्ष्य है. गगनयान मिशन का पहला मानव रहित परीक्षण 2026 में होगा. जानिए पूरी योजना और ताजा अपडेट.

भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' ने सफलतापूर्वक 450 किमी की कक्षा में पेलोड स्थापित कर नया इतिहास रच दिया. सफल लॉन्च के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काइरूट एयरोस्पेस की टीम से फोन पर बात कर वैज्ञानिकों और युवाओं की सराहना की.

स्काईरूट एयरोस्पेस आज अपने पहले प्राइवेट ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल 'विक्रम-1' का प्रक्षेपण करेगी, जिसे भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन की सफलता की शुभकामनाएं देते हुए इसे युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक बताया.

Vikram 1 Launch: भारत कुछ ही दिनों में इतिहास रचने जा रहा है. हैदराबाद की एक प्राइवेट कंपनी स्काईरूट एरोस्पेस अपने पहले ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' को अंतरिक्ष में लॉन्च कराएगी. जानिए इसके कारण क्‍यों दुश्मन देशों की नींद उड़ी.

ISRO Brain Drain: गगनयान मिशन के बीच इसरो में उथल-पुथल मची है. 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों के इस्तीफे के बाद अंतरिक्ष विभाग ने 14 जुलाई को सख्त आदेश जारी कर इस्तीफे और वीआरएस पर रोक लगा दी है. जानें क्या होता है ब्रेन ट्रेन जिसे रोकने के लिए सख्त फैसला लिया गया?

आरएसएस की प्रेरणा से संचालित राष्ट्रवादी संगठन भारत भारती का पांचवां राष्ट्रीय अधिवेशन पुणे में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ.

ISRO Apprentice Vacancy 2026: ISRO ISTRAC ने वर्ष 2026-27 के लिए ग्रेजुएट, डिप्लोमा और ITI अप्रेंटिस के 95 पदों पर भर्ती निकाली है। योग्य उम्मीदवार 31 जुलाई 2026 तक ईमेल के जरिए आवेदन कर सकते हैं। चयन इंटरव्यू के आधार पर होगा।

ISRO जल्द ही गगनयान मिशन के बाद आम लोगों के लिए भी अंतरिक्ष के दरवाजे खोल सकता है. अब सिर्फ पायलट ही नहीं, बल्कि साइंस और टेक्नोलॉजी से जुड़े लोग भी एस्ट्रोनॉट बनने का सपना पूरा कर पाएंगे.

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव जुड़ गया है. इस सफलता ने भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में ला दिया जो स्वदेशी तकनीक से अपने नागरिकों को अंतरिक्ष भेजने और वापस लाने की क्षमता रखते हैं.