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Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
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mahakumbh 2025

सोशल मीडिया पर वर्ष 1954 के कुंभमेले का वीडियो सामने आया है. इसमें देश के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, पूर्व राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद और तत्कालीन मुख्यमंत्री पं. गोविंद बल्लभ पंत नजर आ रहे हैं. कुछ लोग हाथी पर सवार होकर गंगातट पहुंचे थे.

प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बयान आया है. उन्होंने कहा, ' यह महाकुंभ 'मृत्युकुंभ' में बदल गया है.

प्रयागराज महाकुंभ के दौरान अडानी ग्रुप इस्कॉन संस्था के साथ मिलकर श्रद्धालुओं के लिए भोजन-प्रसाद वितरित करा रहा है. अडानी परिवार के सेवा कार्यों से यह प्रतीत होता है कि धर्म और समाज सेवा के क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है.

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में 18 की मौत हो गई थी, 12 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. रेलवे ने सुरक्षा इंतजाम बढ़ाए और मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने का ऐलान किया.

Fire Incident at Prayagraj Mahakumbh: प्रयागराज महाकुंभ मेला क्षेत्र में फिर आग लगने की घटना सामने आई है. यह आग सेक्टर-8 में लगी. इस महीने में यह 5वीं बार आग लगने की घटना है. महाकुंभ में भारी भीड़ जारी है.

उत्तर रेलवे ने महाकुंभ मेला के दौरान यात्रियों की सुविधा को देखते हुए चार विशेष ट्रेनें चलाने की घोषणा की है. इस फैसले का उद्देश्य बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करना और श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम बनाना है.

Bihar Youth Innovative Travel Solutions: महाकुंभ मेले में शामिल होने के लिए बिहार के नौजवानों ने खुद की ऑटोमेटिक बोट बनाई. उसके जरिए बक्सर जिले से गंगा नदी में प्रयाग तक 550 किमी की यात्रा की.

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने त्रिवेणी संगम में स्नान कर महाकुंभ 2025 में भाग लेने को सौभाग्य बताया. उन्होंने महाकुंभ को सनातन संस्कृति और परंपराओं की जीवंतता का प्रतीक कहा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के परिप्रेक्ष्य में जब जलवायु परिवर्तन की बात करते हैं तो एक-दूसरे पर दोषारोपण होने लगता है. यही स्थिति महाकुम्भ में भी देखने को मिल रही है. एरियल सर्वे में देख रहा था कि पार्किंग की जगह खाली है, लेकिन हर व्यक्ति सड़क पर अपनी गाड़ी खड़ी करके संगम स्नान को जा रहा है.

महाकुंभ में नागा साधुओं ने संगम की रेत पर पर्यावरण संरक्षण के लिए हुंकार भरी और नदी शुद्धिकरण का संकल्प लिया. शिप्रा पाठक और अन्य साधुओं ने हर व्यक्ति को एक पौधा लगाने का आह्वान किया और पर्यावरण को बचाने के लिए जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया.