Bharat Express DD Free Dish

NASA

50 साल बाद मानवता फिर चांद के करीब पहुंची! नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों ने 6.9 लाख मील का सफर तय कर प्रशांत महासागर में सफल लैंडिंग की. यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानी बस्ती बसाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है.

Spaceflight Effects: अंतरिक्ष में शरीर पर बड़ा खतरा रेडिएशन का होगा. NASA ने 'रीज' नाम से 5 जोखिम बताए हैं. रेडिएशन से कैंसर, दिल की बीमारी और मोतियाबिंद का खतरा बढ़ता है. लंबे मिशन में ये और ज्यादा खतरनाक हो जाता है.

NASA Hiding Truth 3I ATLAS: 3I/ATLAS हमारे सौरमंडल से गुजरने वाला तीसरा ज्ञात पिंड है. जो मूल रूप से अन्य ग्रहों से आया हो सकता है. हॉर्वर्ड वैज्ञानिक ने दावा किया कि इसका प्रक्षेप पथ अजीब और संदिग्ध है. ऐसी चीजें धूमकेतु में नहीं दिखती हैं.

NASA की चुप्पी ने 3I/ATLAS इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट को लेकर अफवाहों को जन्म दिया है. अमेरिकी सरकारी कामकाज बंद होने के कारण NASA ने अपनी वेबसाइट अपडेट भी रोक दी है.

Sunita Williams Birthday: भारत की मिट्टी से जुड़े कई ऐसे अंतरिक्ष यात्री हैं, जो भले ही यहां से दूर हों, पर उनके दिल में हिंदुस्तान बसता है. इनमें सुनीता विलियम्स का नाम प्रमुख है, जिनका जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका में हुआ. उनके बारे में जानिए

NASA ISRO NISAR Satellite: 30 जुलाई का दिन भारत के लिए एक और उपलब्धी से भरा रहा. नासा और इसरो की संयुक्त सिंथेटिक अपर्चर रडार (निसार) सैटेलाइट निसार ने अंतरिक्ष में उड़ान भरी है.

NISAR Satellite Launch: 1.5 बिलियन डॉलर के इस मिशन का उद्देश्य पृथ्वी की सतह की निगरानी के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव लाना है. इसका खास मकसद प्राकृतिक आपदाओं और पर्यावरण में हो रहे बदलावों पर बारीकी से नजर रखना है.

Shubhanshu Shukla Family Happiness: एक्सिओम-4 मिशन धरती पर लैंड हो गया है. भारत के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की धरती वापसी पर उनके परिवार ने खुशी जाहिर की है. आइये जानें उनके परिवार के सदस्यों ने क्या कहा?

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के अंतरिक्ष यात्रा पूरी होने और उनकी धरती पर वापसी को लेकर पीएम मोदी ने खुशी जताई है. उन्होंने X पोस्ट कर देश को बधाई दी है.

भारतीय अंतरिक्ष यात्री Shubhanshu Shukla एक्सिओम-4 मिशन के तहत 15 जुलाई को दोपहर 3 बजे पृथ्वी पर लौटेंगे. नासा ने पुष्टि की है कि उनका स्प्लैशडाउन प्रशांत महासागर में होगा. टीम ने अंतरिक्ष में 14 दिन के दौरान कई वैज्ञानिक प्रयोग किए.