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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एएमयू, जामिया मिल्लिया और मानू(MANUU) के कुलपतियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर शैक्षणिक उत्कृष्टता और ‘विकसित भारत’ विज़न को दी नई दिशा

अल्पसंख्यक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा क़दम: प्रो. शाहिद अख्त़र (NCMEI के कार्यवाहक अध्यक्ष एवं AMU कार्यकारी परिषद में राष्ट्रपति के नामांकित सदस्य) ने कुलपतियों के साथ विचार-विमर्श में लिया भाग। मंत्री, तीनों विश्विद्यालयों के प्रतिनिधियों ने इन संस्थानों को भारत के समावेशी विकास के सशक्त और प्रभावी स्तंभों के रूप में और मजबूत किये जाने का रास्ता तय किया। साथ ही शैक्षणिक उत्कृष्टता और सामाजिक सद्भाव के केन्द्र में विकसित भारत का रोडमैप तैयार किया जा रहा है।

नई दिल्ली: भारत के प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों की संस्थागत मज़बूती के लिए एक महत्वपूर्ण क़दम उठाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) , जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) और मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय (MANUU) की प्रगति, उपलब्धियों और भविष्य की रूपरेखा पर ध्यान केंद्रित किया गया।

इस उच्चस्तरीय बैठक में अपर सचिव (केंद्रीय विश्वविद्यालय), जेएमआई, मानू और एएमयू के वाइस चांसलर, एनसीएमईआई के कार्यकारी अध्यक्ष तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। चर्चाओं में इन ऐतिहासिक संस्थानों को विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य से जोड़ने तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया।

शैक्षणिक उत्कृष्टता को मिली नई रफ्त़ार

बैठक को अत्यधिक रचनात्मक और सकारात्मक बताया गया। इसमें शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, नवाचार और समग्र संस्थागत विकास को आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया। वार्ता में समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने, सामाजिक सद्भाव को मज़बूत करने और समाज के सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करने में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की अपरिहार्य भूमिका को रेखांकित किया गया।

मुख्य एजेंडे को संबोधित करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप इन संस्थानों को समर्थन देने के लिए भारत सरकार की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही निरंतर संवाद, नीति-स्तरीय सहयोग और संस्थागत सुधारों के महत्व पर बल दिया गया।

प्रो. शाहिद अख्त़र की दोहरी भूमिका ने बढ़ाई रणनीतिक गहराई

क़ानूनी और प्रशासनिक विशेषज्ञता के अनूठे संगम के साथ प्रोफ़ेसर (डॉ.) शाहिद अख्त़र, जो वर्तमान में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) के कार्यवाहक अध्यक्ष हैं, ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ देश भर के अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के सशक्तिकरण, स्थिरता और समग्र विकास पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने इस काम को एक शिक्षित, कुशल और सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया। पांच महीने पहले ही, एएमयू के शीर्ष शासी निकाय को मज़बूत करने की दिशा में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने प्रो. अख्त़र को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (AMU Executive Council) में राष्ट्रपति का नामांकित सदस्य नियुक्त किया था। जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रबंधन विभाग के विद्वान प्रो. अख्त़र एएमयू के सर्वोच्च निर्णयकारी निकाय में शासन, प्रशासन और नैतिक प्रबंधन की मज़बूत विशेषज्ञता का योगदान देते हैं।

जेएमआई(JMI), एएमयू(AMU) और मानू(MANUU) की नेतृत्वकारी भूमिका

तीनों केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भी इन विचार-विमर्शों में सक्रिय भाग लिया:

  • प्रो. मज़हर आसिफ़ (कुलपति, जामिया मिलिया इस्लामिया, JMI): प्रो. आसिफ़ लगातार भारतीय भाषाओं की भूमिका पर बल देते रहे हैं ताकि मनुष्यों को औपनिवेशिक अतीत से मुक्त किया जा सके। विकसित भारत 2047 के विजन के बारे में बोलते हुए प्रो. आसिफ ने लगातार भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) को प्राथमिकता देने का आह्वान किया है। उनका कहना है, “आधुनिकता की झूठी अवधारणा लोगों के दिमाग पर जहरीला प्रभाव डालती है। हमें इसे तुरंत सुधारने की आवश्यकता है।”

  • प्रो. सैयद ऐनुल हसन (कुलपति, मानू,MANUU): पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित प्रो. हसन जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से फारसी और मध्य एशियाई अध्ययन के प्रोफेसर हैं। उनके नेतृत्व में मानुऊ सक्रिय रूप से अपने परिसर के विस्तार, महिलाओं के लिए नए पाठ्यक्रम शुरू करने तथा ज्ञान, संसाधनों और अनुसंधान गतिविधियों को साझा करने के लिए सामरिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

  • प्रो. नईमा ख़ातून (कुलपति, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय,AMU): एक ऐतिहासिक उपलब्धि में, प्रो. ख़ातून ने एएमयू की स्थापना के 123 साल बाद विश्वविद्यालय की पहली महिला कुलपति का पदभार ग्रहण किया। उनकी नियुक्ति, जिसे हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने बरक़रार रखा, भारत के सबसे पुराने आवासीय विश्वविद्यालयों में से एक में समावेशिता के एक नए युग का प्रतीक है।

आगे का रास्ता

बैठक इस साझा संकल्प के साथ समाप्त हुई कि इन संस्थानों को भारत के समावेशी विकास के सशक्त और प्रभावी स्तंभों के रूप में और मजबूत किया जाएगा। प्रो. शाहिद अख्तर शिक्षा मंत्रालय, एनसीएमईआई और एएमयू के प्रतिच्छेदन पर नीति और शासन को जोड़ रहे हैं, और कुलपति संस्थागत सुधारों का नेतृत्व कर रहे हैं – इसी के साथ शैक्षणिक उत्कृष्टता और सामाजिक सद्भाव के केन्द्र में विकसित भारत का रोडमैप तैयार किया जा रहा है।

—– भारत एक्सप्रेस



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