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up politics

गाजीपुर के मरदह में पहुंचे कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने जनता की समस्याएं सुनीं और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर हमला किया.

उत्तर प्रदेश भाजपा को जल्द ही नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने जा रहा है। लंबे इंतजार के बाद पार्टी ने चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है। 13 दिसंबर को दोपहर 1 से 2 बजे तक नामांकन प्रक्रिया होगी, जबकि 14 दिसंबर को प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव संपन्न कराया जाएगा। इस चुनाव के लिए पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक विनोद तावड़े लखनऊ पहुंचेंगे। प्रदेश के करीब 400 प्रांतीय परिषद सदस्य मतदान करेंगे। 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी ऐसा चेहरा चुन सकती है, जो संगठन और सरकार के बीच मजबूत समन्वय स्थापित कर सके।

UP Political Update: उत्तर प्रदेश में BJP के नए अध्यक्ष को लेकर चर्चाएं तेज हैं और सूत्रों के अनुसार पंकज चौधरी का नाम लगभग तय माना जा रहा है. 13 दिसंबर को यूपी बीजेपी मुख्यालय में नामांकन प्रक्रिया होगी.

उत्तर प्रदेश की राजनीति में स्मारक, पार्क और विशाल मूर्तियां अब सिर्फ पत्थर नहीं, बल्कि सत्ता की पहचान बन गए हैं। बसपा ने दलित प्रतीकों और भव्य मूर्तियों से अपनी विरासत गढ़ी, एसपी ने समाजवादी नेताओं के नाम पर पार्क बनाकर विकास और समाजवाद का संदेश दिया, और अब बीजेपी राष्ट्रवादी प्रेरणा स्थलों के जरिए अपनी विचारधारा को मजबूत करने में लगी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि 2027 चुनावों से पहले यह प्रतीकात्मक राजनीति और तेज होगी। सवाल यह है कि क्या ये स्मारक जनता के जीवन में विकास लाएंगे या सिर्फ राजनीतिक संदेश बनकर रह जाएंगे?

उत्तर प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए समय बढ़ाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 9 दिसंबर को सुनवाई करेगा.

बिहार चुनाव के नतीजों को लेकर बिहार में विपक्ष के नेता तो मंथन कर ही रहे हैं इधर यूपी में सपा मुखिया अखिलेश यादव भी गुणा गणित लगा रहे हैं और बिहार में हार की वजहों को सुधारते हुए यूपी में विधानसभा चुनाव की तैयारियां कर रहे हैं...

यूपी सरकार ने नया आदेश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब आधार कार्ड को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार का कहना है कि आधार केवल पहचान पत्र है और इसमें दर्ज जन्मतिथि अंतिम प्रमाणिक दस्तावेज नहीं माना जा सकता। इस फैसले पर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे जनता को परेशान करने वाला तुगलकी फरमान बताया, जबकि सरकार का दावा है कि कई लोग आधार में गलत जन्मतिथि दर्ज कराते हैं, जिसे रोकने के लिए यह कदम जरूरी था। अब आगे देखना है कि प्रक्रिया को सरल किया जाएगा या विवाद बढ़ेगा।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दावा किया कि यह प्रक्रिया केवल मतदाता सूची सुधार नहीं, बल्कि देश की मूल संरचना को कमजोर करने की कोशिश है। उनका आरोप है कि वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे आम लोगों के अधिकार प्रभावित होंगे। उन्होंने जनता और सभी दलों से अपील की है कि वे इस मुद्दे पर जागरूक रहें और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा करें।

उत्तर प्रदेश की सियासत में नई हलचल तब मच गई जब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लंबे अरसे बाद आमने-सामने मिले। लखनऊ में हुई यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि सपा परिवार में दोबारा एकजुटता का संकेत मानी जा रही है। आज़म खान ने धर्म के नाम पर डर फैलाने की राजनीति की आलोचना की और कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में वे “मजबूत हिस्सेदार” बनेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मेल-मिलाप सपा के लिए आने वाले चुनावों में बड़ा असर डाल सकता है।

आज़म खान ने कहा कि हमारे दुश्मन भी नादान हैं. हमसे दुश्मनी का कोई मतलब ही नहीं है. किसी को हमने नुकसान नहीं पहुंचाया है. आपके माध्यम से कह रहा हूं, मेरी कलम से किसी को नुकसान पहुंचा तो बताएं.