दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट
UP News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पाकिस्तान जिंदाबाद कहने वाली फेसबुक पोस्ट साझा करने के आरोपित अंसार अहमद सिद्दीकी को जमानत देने से इन्कार करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा, “राष्ट्र-विरोधी मानसिकता वाले व्यक्तियों के प्रति न्यायिक सहिष्णुता के कारण ऐसे अपराध तेजी से आम हो चले हैं. न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने कहा कि आरोपित का कृत्य संविधान और उसके आदर्शों के प्रति अपमानजनक था और भारत की संप्रभुता को चुनौती देने के बराबर है.
कोर्ट की राय थी कि “असामाजिक और भारत विरोधी पोस्ट” भी भारत की एकता और अखंडता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने के बराबर है. न्यायालय ने कहा, याची 62 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक है और उसकी उम्र से पता चलता है कि वह स्वतंत्र भारत में पैदा हुआ है. उसका गैर-जिम्मेदाराना और राष्ट्र-विरोधी आचरण उसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत स्वतंत्रता के अपने अधिकार की सुरक्षा मांगने का अधिकार नहीं देता है.
अनुच्छेद 21 का हवाला बेअसर
कोर्ट ने कहा, अनुच्छेद 51-ए (ए) के अनुसार, भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह संविधान का पालन करे और इसके आदर्शों और संस्थानों, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करे और उप खंड (सी) के अनुसार, भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को बनाए रखे और उसकी रक्षा करे.
अभियोजन के अनुसार, सिद्दीकी ने तीन मई को फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर की थी जिसमें “जिहाद का प्रचार करने, पाकिस्तान जिंदाबाद कहने और अपने भाइयों से पाकिस्तानी भाइयों का समर्थन करने की अपील”थी. कथित तौर पर इस पोस्ट ने राष्ट्रीय भावनाओं को ठेस पहुंचाई और संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ़ काम किया. जमानत की सुनवाई के दौरान आरोपित का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने कहा कि याची 62 साल का है और उसका इलाज चल रहा है.
जमानत अर्जी खारिज की
राज्य सरकार के वकील ने कश्मीर में पहलगाम आतंकी हमले का हवाला देते हुए कहा, “वीडियो श्रीनगर में पहलगाम में 26 निर्दोष हिंदुओं की हत्या के बाद पोस्ट किया गया है और यह स्पष्ट रूप से साबित करता है कि याची धार्मिक आधार पर भी आतंकवादियों के कृत्य का समर्थन करता है.” दलीलों पर विचार करते हुए, अदालत ने जमानत अर्जी खारिज कर दिया और ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह जल्द से जल्द मुकदमे का विचारण पूरा करे.
एकल न्यायाधीश ने कहा, “इस देश में ऐसे अपराध करना आम बात हो गई है, क्योंकि अदालतें राष्ट्रविरोधी मानसिकता वाले लोगों के ऐसे कृत्यों के प्रति उदार और सहनशील हैं. इस समय आवेदक को जमानत पर रिहा करना उचित मामला नहीं है. याची के खिलाफ बीएनएस की धारा 197, 152 के अंतर्गत थाना छतारी, जिला-बुलंदशहर में केस दर्ज किया गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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