लखनऊ के भातखंडे विश्वविद्यालय में तबला-भरतनाट्यम HOD गिरफ्तार, प्रशासनिक अधिकारी गर्लफ्रेंड संग फरार, यूपी में बड़ा घोटाला सामने आया।
Bhatkhande University Scam: लखनऊ के भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय (Bhatkhande Sanskriti Vishwavidyalaya) में घोटाले का ऐसा राग छेड़ा गया है कि तबले और भरतनाट्यम की थाप भी फीकी पड़ गई है. CB-CID की कार्रवाई में विश्वविद्यालय के तबला विभाग के HOD मनोज मिश्रा और भरतनाट्यम विभाग के HOD ज्ञानेंद्र दत्त बाजपेई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. इन दोनों पर पूर्व कुलपति के कार्यकाल में हुए 3 करोड़ से ज्यादा के घोटाले में शामिल रहने का आरोप है.
दो प्रोफेसरों के बीच असली परफॉर्मर 5वीं पास निकला. जो विश्विविद्यालय में प्रशासनिक अधिकारी के पद पर डेरा जमाए हुए था. जो CB-CID कार्रवाई के डर से फरार हो गया. उसके साथ उसकी गर्लफ्रैंड भी भाग गई है.
दोनों प्रेफेसरों को भेजा गया जेल
CB-CID ने दोनों प्रेफेसरों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. तबला HOD मनोज मिश्रा और भरतनाट्यम के HOD ज्ञानेंद्र दत्त बाजपेई पर पूर्व कुलपति श्रुति सडोलिकर काटकर के कार्यकाल के दौरान 3 करोड़ से ज्यादा रुपये की नियुक्ति और निर्माण घोटाले में सहयोगी होने का आरोप है.
पांचवीं पास निकला प्रशासनिक अधिकारी
बताया जा रहा है कि पांचवीं पास प्रशासनिक अधिकारी रामकुमार इस पूरे घोटाले का मैनेजर है. CB-CID और पुलिस उसके घर से लेकर रिश्तेदारों के यहां छापेमारी कर रही है. लेकिन वो मिल नहीं रहा है. वहीं बताया जा रहा है कि 5वीं पास की गर्लफ्रैंड भी अपने फ्लैट में ताला मारकर फरार हो गई है. इसके साथ ही CB-CID ने 7 ठेकेदारों को भी गिरफ्तार कर लिया है.
राज्यपाल को मिली थी Bhatkhande University scam की शिकायत
बता दें कि, 2020 में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को इस मामले की शिकायत मिली थी. जिसके बाद उन्होंने उस समय के कुलपति श्रुति सडोलिकर काटकर को हटाने और केस करने का आदेश दिया था. जिसके बाद तत्कालीन कुलपति के खिलाफ कैसरबाग थाने में केस दर्ज किया गया.
मामला दर्ज होने के तत्काल बाद पूर्व कुलपति कोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे लेकर चली आई. CB-CID इस मामले में पूर्व कुलपति श्रुति सडोलिकर काटकर को गिरफ्तार करने आई, लेकिन स्टे होने की वजह से ऐसा कर नहीं पाई.
क्या है Bhatkhande University scam मामला?
इस मामले को लेकर दर्ज FIR में पूर्व कुलपति श्रुति और विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों पर कई कंपनियों को बिना टेंडर काम देने और उसका भुगतान करने का आरोप लगाया गया है. 2017-2018 में भी इसी तरह बिना टेंडर अलग-अलग कंपनियों को काम देने और भुगतान करने का आरोप लगा है. इस तरह बिना टेंडर ही कई कंपनियों को काम दे दिया गया. जिसको लेकर ये केस चल रहा है.
– भारत एक्सप्रेस
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