ग्रेटर नोएडा: रक्षा बंधन के पर्व पर भेजी गई राखी समय पर ना पहुंचने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने कूरियर कंपनी डीटीडीसी को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए परिवादी को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है. आयोग ने कंसाइनमेंट मूल्य 100 रुपये लौटाने के साथ मानसिक पीड़ा और असुविधा के लिए 5 हजार रुपये तथा वाद व्यय के लिए 1 हजार रुपये 30 दिनों के भीतर अदा करने का निर्देश दिया है. निर्धारित अवधि में भुगतान ना करने पर छह प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज भी देय होगा.
सेक्टर 74 निवासी परिवादिनी अनामिका सिंह के अनुसार उन्होंने 25 अगस्त 2023 को रक्षा बंधन के अवसर पर अपने भाई के लिए राखियां पीले लिफाफे में पैक कर डीटीडीसी की सेक्टर- 76 नोएडा स्थित शाखा के माध्यम से रोहतक (हरियाणा) भेजी थीं.
रक्षा बंधन से पहले खो गया पार्सल
इसके लिए 100 रुपये की रसीद भी काटी गई थी. कूरियर एजेंट ने आश्वासन दिया था कि 30 अगस्त 2023 यानी रक्षा बंधन से पहले पार्सल गंतव्य तक पहुंच जाएगा. मगर 11 सितंबर 2023 तक भी पार्सल नहीं पहुंचा. जब उन्होंने ट्रैकिंग के जरिए स्थिति देखी तो 28 अगस्त को रिसीवर नॉट अवेलेबल और 29 अगस्त को पता अधूरा और गलत होने की टिप्पणी प्रदर्शित हो रही थी.
जबकि लिफाफे पर प्राप्तकर्ता का पूरा पता और दो मोबाइल नंबर अंकित थे. उन्होंने 15 सितंबर 2023 को अधिवक्ता के माध्यम से विधिक नोटिस भी भेजा गया, पर कंपनी की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई.
आयोग ने ग्राहक के पीड़ा को गंभीरता से लिया
आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि केवल 100 रुपये की अधिकतम देयता का हवाला देकर कंपनी पूर्ण रूप से दायित्व से मुक्त नहीं हो सकती. रक्षा बंधन जैसा पारिवारिक और भावनात्मक महत्व का त्योहार समयबद्ध डिलीवरी की अपेक्षा करता है. राखी का समय पर न पहुंचना केवल आर्थिक हानि नहीं, बल्कि मानसिक पीड़ा और भावनात्मक आघात का कारण भी बना.
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-भारत एक्सप्रेस
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