वनटांगिया गांव में फिर पहुंचेगे योगी आदित्यनाथ
गोरखपुर शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर कुसम्ही जंगल के बीच बसे वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन में इन दिनों अलग ही रौनक दिखाई दे रही है. गांव के हर घर में उत्साह का माहौल है और लोग बेसब्री से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने का इंतजार कर रहे हैं. इसकी वजह यह है कि मुख्यमंत्री हर वर्ष दीपावली के अवसर पर यहां पहुंचते हैं और वनटांगिया परिवारों के साथ त्योहार की खुशियां साझा करते हैं. गांव के लोगों के लिए यह केवल एक सरकारी दौरा नहीं बल्कि परिवार के किसी अपने सदस्य के आगमन जैसा अवसर होता है.
घर-घर चल रही स्वागत की तैयारी
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर पूरे गांव में साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और सजावट का काम तेज हो गया है. ग्रामीण अपने घरों को दीपों और रंग-बिरंगी सजावट से संवार रहे हैं. प्रशासन भी कार्यक्रम की तैयारियों में जुटा हुआ है, वहीं ग्रामीण अपने स्तर पर किसी तरह की कमी नहीं छोड़ना चाहते. गांव की गलियों से लेकर घरों के आंगन तक हर जगह त्योहार जैसा उल्लास देखने को मिल रहा है.
दीपोत्सव के साथ विकास योजनाओं की भी बरसात
रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार फिर जंगल तिकोनिया नंबर तीन पहुंचेंगे और वनटांगिया समुदाय के साथ दीपावली मनाएंगे. इस दौरान वे वर्षों तक उपेक्षित रहे इस समाज के लोगों के साथ खुशियां बांटेंगे. साथ ही 82.41 करोड़ रुपये की लागत वाली 52 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे. इन योजनाओं में वनटांगिया गांवों को बेहतर संपर्क देने वाली इंटरलॉकिंग सड़क, कुसम्ही जंगल में ईको पार्क का निर्माण तथा पिपराइच क्षेत्र में वैश्विक नगर बाजार विकसित करने जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं.
सांसद रहते शुरू की परंपरा आज भी कायम
योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया समाज के साथ दीपावली मनाने की शुरुआत उस समय की थी, जब वे गोरखपुर के सांसद और गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी थे. मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने इस परंपरा को नहीं छोड़ा. आज भी उनकी दीपावली की शुरुआत इसी गांव से होती है. यही कारण है कि गांव के लोगों के मन में उनके प्रति विशेष लगाव है. उनके आने की खबर मिलते ही ग्रामीण तैयारियों में जुट जाते हैं और पूरे उत्साह के साथ स्वागत की योजना बनाते हैं.
सौ वर्षों की उपेक्षा झेल चुका है वनटांगिया समाज
वनटांगिया समुदाय का इतिहास काफी संघर्षों से भरा रहा है. लंबे समय तक यह समुदाय बुनियादी सुविधाओं और अधिकारों से वंचित रहा. इन लोगों को सामाजिक मुख्यधारा से जोड़ने और सम्मानजनक जीवन दिलाने की दिशा में योगी आदित्यनाथ की भूमिका को ग्रामीण बेहद अहम मानते हैं. गांव के लोग मानते हैं कि अगर समय रहते उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता तो उनका जीवन आज भी अभावों से घिरा रहता.
अंग्रेजों के समय शुरू हुई थी वनटांगिया बस्तियों की कहानी
ब्रिटिश शासनकाल में रेलवे लाइन बिछाने के लिए साखू के पेड़ों की बड़े स्तर पर कटाई की गई थी. बाद में जंगलों को फिर से विकसित करने के लिए अंग्रेज सरकार ने गरीब, भूमिहीन और मजदूर परिवारों को जंगलों में बसाया. इन लोगों को नए पौधे लगाने और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी दी गई. इस काम के लिए बर्मा की “टांगिया पद्धति” अपनाई गई थी. इसी पद्धति के तहत जंगलों में रहकर पौधों का संरक्षण करने वाले लोगों को बाद में वनटांगिया कहा जाने लगा.
1918 में बनीं थीं पांच प्रमुख बस्तियां
वर्ष 1918 में कुसम्ही जंगल क्षेत्र के पांच स्थानों पर वनटांगिया बस्तियों की स्थापना हुई. इनमें जंगल तिकोनिया नंबर तीन, रजही खाले टोला, रजही नर्सरी, आमबाग नर्सरी और चिलबिलवा शामिल थे. इसके अलावा महराजगंज जिले के जंगलों में भी अलग-अलग जगहों पर वनटांगिया समुदाय के 18 गांव बसाए गए. इन बस्तियों ने जंगलों को बचाने और विकसित करने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन बदले में उन्हें लंबे समय तक मूलभूत अधिकार भी नहीं मिल पाए.
आजादी के बाद भी नहीं बदली तकदीर
देश को 1947 में स्वतंत्रता मिल गई, लेकिन वनटांगिया समाज की हालत में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया. इनके पास नागरिकता संबंधी अधिकार तक नहीं थे. सरकारी योजनाएं और सुविधाएं तो बहुत दूर की बात थीं. इन परिवारों को जंगल के भीतर केवल झोपड़ियां बनाने की अनुमति थी. जीविका चलाने के लिए पत्तियां तोड़ना और मजदूरी करना ही मुख्य सहारा था. इसके साथ ही इन्हें हमेशा जंगल से हटाए जाने का डर भी सताता रहता था.
सांसद बनने के बाद योगी ने सुनी वनटांगियों की पीड़ा
1998 में पहली बार सांसद बनने के बाद योगी आदित्यनाथ का ध्यान वनटांगिया बस्तियों की समस्याओं की ओर गया. उन्होंने महसूस किया कि यहां रहने वाले लोग बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे हैं. इसके बाद उन्होंने इन बस्तियों तक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का संकल्प लिया और इस दिशा में लगातार प्रयास शुरू किए.
शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए शुरू हुई पहल
योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं एमपी कृषक इंटर कॉलेज और एमपीपीजी कॉलेज जंगल धूसड़ को इस अभियान से जोड़ा गया. वहीं गोरखनाथ मंदिर की ओर से संचालित गुरु श्री गोरक्षनाथ अस्पताल की मोबाइल मेडिकल सेवा भी गांव तक पहुंचाई गई. जंगल तिकोनिया नंबर तीन में 2003 के आसपास शुरू हुई ये पहल 2007 तक एक मजबूत स्वरूप लेने लगी थी. इसका लाभ बड़ी संख्या में ग्रामीणों को मिलने लगा.
ग्रामीण आज भी याद करते हैं पुराने दिन
गांव के निवासी रामगणेश बताते हैं कि एक समय ऐसा था जब वनटांगिया समाज पूरी तरह उपेक्षित था. उनके अनुसार, अगर योगी आदित्यनाथ का सहयोग न मिला होता तो समुदाय आज भी बदहाली में जीवन गुजार रहा होता. ग्रामीणों का कहना है कि उनके जीवन में जो सकारात्मक बदलाव आया है, उसकी शुरुआत इन्हीं प्रयासों से हुई.
स्कूल के लिए लड़नी पड़ी कानूनी लड़ाई
वनटांगिया बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए योगी आदित्यनाथ को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. वर्ष 2009 में जब जंगल तिकोनिया नंबर तीन में बच्चों के लिए एस्बेस्टस शीट से अस्थायी स्कूल बनाया जा रहा था, तब वन विभाग ने इसे अवैध बताते हुए मुकदमा दर्ज कर दिया. हालांकि योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में मजबूती से अपना पक्ष रखा और अंततः स्कूल का निर्माण पूरा हो सका. गोरक्षनाथ हिंदू विद्यापीठ नाम से संचालित यह विद्यालय आज भी उस संघर्ष की कहानी बयां करता है.
दीपावली से जुड़ी एक अनोखी परंपरा
वर्ष 2009 से योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया समुदाय के साथ दीपोत्सव मनाने की शुरुआत की. यह आयोजन समुदाय के लिए किसी नई दुनिया से परिचय जैसा था क्योंकि पहली बार उन्हें त्योहारों का इतना बड़ा सामूहिक उत्सव देखने और उसमें शामिल होने का अवसर मिला. समय के साथ यह आयोजन एक परंपरा बन गया. मुख्यमंत्री बनने के बाद भी योगी ने इसे जारी रखा और हर साल गांव पहुंचकर लोगों के साथ दीपावली मनाई.
बच्चों को देते हैं पढ़ाई की प्रेरणा
दीपोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री बच्चों को मिठाई, कॉपी-किताब और आतिशबाजी जैसे उपहार भेंट करते हैं. इसके साथ ही शिक्षा के महत्व पर भी जोर देते हैं. बस्ती के लोगों को विभिन्न योजनाओं की सौगात भी दी जाती है, जिससे उनके जीवन स्तर में लगातार सुधार हो रहा है.
मुख्यमंत्री बनने के बाद आया बड़ा बदलाव
मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया समुदाय की दशकों पुरानी समस्याओं के समाधान की दिशा में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए. वर्ष 2010 में उन्होंने वनटांगियों के अधिकारों को लेकर संसद में आवाज भी उठाई थी और उन्हें अपने स्थान पर रहने का अधिकार पत्र दिलाने में भूमिका निभाई थी. मुख्यमंत्री बनने के पहले ही साल उन्होंने वनटांगिया गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया.
राजस्व ग्राम बनने से खुल गया विकास का रास्ता
राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने के बाद वनटांगिया गांवों को वही सुविधाएं मिलने लगीं, जो अन्य सामान्य गांवों को प्राप्त होती हैं. इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंचने लगा. गोरखपुर और महराजगंज के कुल 23 वनटांगिया गांवों में इसका असर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा और विकास कार्यों की गति तेज हुई.
गांवों में पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं
मुख्यमंत्री के कार्यकाल में वनटांगिया गांवों में आवास, सड़क, बिजली, पेयजल, विद्यालय, स्ट्रीट लाइट, आंगनबाड़ी केंद्र और आरओ वाटर मशीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं. इसके अलावा लोगों को पक्के मकान, खेती के लिए जमीन, आधार कार्ड, राशन कार्ड और रसोई गैस कनेक्शन भी मिले. सरकारी योजनाओं के माध्यम से पात्र लोगों को वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन का लाभ भी मिलने लगा.
जंगल तिकोनिया नंबर तीन बना मिसाल
जंगल तिकोनिया नंबर तीन गांव में लगभग सभी सरकारी योजनाओं का लाभ लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत लोगों तक पहुंच चुका है. यही वजह है कि यह गांव वनटांगिया विकास का एक प्रमुख उदाहरण माना जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि आज उनके गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है और विकास धरातल पर दिखाई देता है.
ग्रामीणों की जुबान पर आज भी ‘बाबा’
रामगणेश बताते हैं कि गांव में जो भी बड़ा विकास कार्य नजर आता है, उसके पीछे योगी आदित्यनाथ की भूमिका रही है. वे कहते हैं कि पहले उनकी समस्याएं सुनने वाला कोई नहीं था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. उनके अनुसार, घर, शौचालय, बिजली, रसोई गैस, खेती के लिए भूमि पट्टा और बच्चों की शिक्षा जैसी सुविधाओं ने गांव के जीवन को नई दिशा दी है.
विकास कार्यों की फिर मिलेगी नई सौगात
इस बार भी मुख्यमंत्री वनटांगिया गांव में दीपावली मनाने के साथ विकास परियोजनाओं का तोहफा देंगे. कुल 82.41 करोड़ रुपये की लागत वाली 52 परियोजनाओं में से 26 कार्यों का शिलान्यास होगा, जिनकी लागत 77 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपये है. वहीं 26 विकास कार्यों का लोकार्पण किया जाएगा, जिन पर 4 करोड़ 43 लाख 79 हजार रुपये खर्च हुए हैं.
इंटरलॉकिंग सड़क बनेगी बड़ी सुविधा
रजही चौराहे से जंगल तिकोनिया नंबर तीन होते हुए पिपराइच मार्ग तक इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण भी प्रस्तावित है. इस परियोजना पर 3 करोड़ 65 लाख 11 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे. इसके बनने से वनटांगिया गांवों की बाहरी संपर्क व्यवस्था और मजबूत होगी तथा लोगों का आवागमन पहले से कहीं आसान हो जाएगा.
ईको पार्क और वैश्विक बाजार की भी तैयारी
मुख्यमंत्री जिन महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे उनमें कुसम्ही जंगल में ईको पार्क और पिपराइच नगर पंचायत में वैश्विक नगर बाजार का निर्माण भी शामिल है. ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कुसम्ही जंगल में 4 करोड़ 84 लाख 81 हजार रुपये की लागत से ईको पार्क विकसित किया जाएगा. वहीं पिपराइच में वैश्विक नगर बाजार के निर्माण पर 1 करोड़ 91 लाख 51 हजार रुपये खर्च होंगे.
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पर्यटकों और व्यापार दोनों को मिलेगा लाभ
प्रस्तावित ईको पार्क में स्विस कॉटेज सहित कई आधुनिक सुविधाएं मौजूद रहेंगी. हरियाली और प्राकृतिक वातावरण से घिरा यह क्षेत्र पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने की उम्मीद है. यहां आने वाले लोग जंगल के शांत माहौल का आनंद ले सकेंगे. दूसरी तरफ पिपराइच में बनने वाला वैश्विक नगर बाजार स्थानीय व्यापार को नई गति देगा. इससे बाजार व्यवस्था मजबूत होगी और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. कुल मिलाकर वनटांगिया गांव में दीपोत्सव केवल त्योहार का आयोजन नहीं, बल्कि विकास और बदलाव के उत्सव के रूप में भी देखा जा रहा है.
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