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विशेष

31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ के सिविल सचिवालय परिसर में हुए आत्मघाती बम धमाके में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह समेत 17 लोगों की मौत हो गई थी. जानिए कैसे रची गई थी इस हमले की साजिश.

आजादी के बाद भारत का नक्शा कभी एक जैसा नहीं रहा. रियासतों के विलय से शुरू हुई यह यात्रा भाषाई आंदोलनों, क्षेत्रीय आकांक्षाओं और राजनीतिक फैसलों के साथ लगातार बदलती गई. 31 अगस्त 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित हुआ.

31 अगस्त को विमुक्ति दिवस उन घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों की मुक्ति की याद में मनाया जाता है, जिन्हें ब्रिटिश शासन ने ‘जन्मजात अपराधी’ घोषित किया था.

कर्नाटक के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री और मूल्य-आधारित राजनीति के प्रतीक रामकृष्ण हेगड़े की 100वीं जयंती पर जानिए कैसे उन्होंने परिवार को सत्ता से दूर रखकर त्रिस्तरीय पंचायत राज और लोकायुक्त की नींव रखी थी.

एक वैज्ञानिक और स्कूली बच्चों के संवाद के जरिए ‘अमृत कुम्भ: हिन्दू भाव का मंगल कलश’ धर्म, संस्कृति और राष्ट्रबोध से जुड़े सवालों को आसान भाषा में सामने लाती है. अभिजीत सिंह की यह पुस्तक नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ आस्था और तर्क के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती है.

पोप फ्रांसिस की आत्मकथा ‘आशाओं की एक विरासत’ उनके जीवन के साथ-साथ उनके विचारों और मानवीय सरोकारों को भी सामने लाती है.

27 अगस्त 1939 को जर्मनी के रोस्टॉक एयरफील्ड में हेइंकेल एचई-178 ने दुनिया के पहले जेट विमान के रूप में इतिहास रचा है.

सारनाथ के गौरवशाली इतिहास, सम्राट अशोक के सिंह चतुर्मुख स्तंभ और भारत के राष्ट्र चिह्न की जब भी बात होती है, तो ब्रिटिश पुरातत्वविदों के नाम प्रमुखता से सामने आते रहे हैं. लेकिन 200 से अधिक वर्षों तक गुमनाम रहे उस भारतीय - बाबू जगत सिंह - का नाम आखिरकार आधिकारिक इतिहास का हिस्सा बन गया है, जिन्होंने 18वीं सदी में पहली बार सारनाथ के पुरातात्विक महत्व को उजागर किया था. जानिए कैसे उनके वंशज प्रदीप नारायण सिंह के वर्षों के शोध और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के ऐतिहासिक फैसले ने इतिहास के इस सबसे बड़े अन्याय को सुधारा और भारत के नाम एक गौरवशाली पन्ना जोड़ा.

‘हनुमान अंश’ संत नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा और उनके जीवन से जुड़ी प्रेरक घटनाओं को पर्दे पर उतारने वाली फिल्म है.

आज इंटरनेट पर इतनी वेबसाइटें हैं कि उनकी गिनती करना लगभग असंभव है. लेकिन तीन दशक पहले स्थिति बिल्कुल अलग थी. इंटरनेट के इतिहास में 23 अगस्त का दिन बेहद खास है.