Bharat Express DD Free Dish

विशेष

5 सितंबर 1972 को म्यूनिख ओलंपिक में फिलिस्तीनी आतंकियों ने 11 इजरायली खिलाड़ियों की हत्या कर दी थी. इसके जवाब में इजरायल की मोसाद ने 'ऑपरेशन रेथ ऑफ गॉड' चलाकर बदला लिया.

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव को 164 देशों के समर्थन से मंजूरी दी है. प्रस्ताव मर्केटर प्रोजेक्शन की लंबे समय से चली आ रही विकृतियों पर सवाल उठाता है और Equal Earth प्रोजेक्शन के इस्तेमाल की सिफारिश करता है.

5 सितंबर 1986 को कराची में पैन एम फ्लाइट 73 के अपहरण के दौरान 22 वर्षीय नीरजा भनोट ने अदम्य साहस दिखाते हुए सैकड़ों यात्रियों की जान बचाई.

Indian Education Service: शिक्षक दिवस पर सिर्फ भाषण नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में संस्थागत सुधार की जरूरत है. जानिए क्यों कोठारी आयोग की 'भारतीय शिक्षा सेवा' (IES) की सिफारिश आज भी प्रासंगिक है.

बिहार के राघवेंद्र कुमार ने अपने दोस्त की सड़क हादसे में हुई मौत के बाद हेलमेट जागरूकता को अपनी जिंदगी का मिशन बना लिया.

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सिर्फ भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि उनके जीवन, लीलाओं और दिए गए संदेशों को याद करने का अवसर है.

2 सितंबर 1946 भारत की आज़ादी की राह का एक बेहद अहम दिन था. इसी दिन अंतरिम सरकार ने कामकाज संभाला, जिसमें जवाहरलाल नेहरू समेत कई प्रमुख भारतीय नेताओं ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

दुष्यंत कुमार सिर्फ कवि नहीं, बल्कि आम आदमी की बेचैनी, संघर्ष और बदलाव की उम्मीद की आवाज थे. ‘साये में धूप’ जैसी कृति और उनकी अमर पंक्तियां आज भी व्यवस्था पर सवाल उठाने और बदलाव की उम्मीद जगाने का काम करती हैं.

हिंदी को भारत में शोधपरक विस्तार देने में अहम भूमिका निभाने वाला एक प्रमुख नाम विदेशी मूल का ही है. फादर कामिल बुल्के का जीवन भारतीय भाषा, विशेषकर हिंदी के प्रति गहरे प्रेम और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है.

क्या 100 दिनों में सपनों को हकीकत के करीब लाया जा सकता है? डॉ. अमित कुमार की किताब ‘सपनों से उपलब्धि तक: 100 दिन के सूत्र’ इसी सवाल का व्यावहारिक जवाब तलाशती है.