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विशेष

राम सेतु भारत और श्रीलंका के बीच मौजूद प्राकृतिक भूगर्भीय संरचना है, जिसे धार्मिक परंपरा भगवान राम के नल सेतु से जोड़ती है. वैज्ञानिक अध्ययनों में समुद्र के स्तर और कोरल-रेतीली संरचनाओं के प्रमाण मिले हैं, लेकिन मानव निर्मित पुल का निर्णायक सबूत अब तक नहीं मिला.

महाभारत सिर्फ पौराणिक कथाओं का महाकाव्य नहीं है, बल्कि इसमें कई ऐसे दिव्य अस्त्रों का जिक्र है जिनके प्रभाव आधुनिक परमाणु युद्ध, रणनीतिक पक्षाघात और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर से काफी हद तक मेल खाते हैं.

महर्षि सुश्रुत की परंपरा में नाक के पुनर्निर्माण जैसी जटिल शल्य प्रक्रिया का व्यवस्थित विवरण मिलता है, जिसे रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी का शुरुआती उदाहरण माना जाता है.

Mount Kailash Mystery: माउंट कैलाश आज भी अपने पवित्र दर्जे, धार्मिक आस्था, सरकारी पाबंदियों और इस विश्वास की वजह से अछूता है कि इसके शिखर पर पैर नहीं रखा जाना चाहिए.

भारतभूमि के सबसे प्रसिद्ध महाकाव्‍य रामायण के 'उत्तर कांड' में अयोध्‍या के कुछ आमजन द्वारा कही गई बातों के चलते भगवान राम द्वारा सीताजी को वन भेजने का प्रसंग मिलता है, जो आज भी राजधर्म, कर्तव्य और करुणा को लेकर गहरे सवाल खड़े करता है.

5 हजार साल पहले कौरव-पांडवों को अस्त्र-शस्त्रों की शिक्षा देने वाले महान आचार्य द्रोण के पुत्र अश्वत्थामा को महाभारत के उस योद्धा के रूप में याद किया जाता है, जिसे परमेश्वर श्रीकृष्ण ने हजारों साल तक माथे के कोढ़ से परेशान पृथ्वी पर अकेले भटकने का श्राप दिया था.

सनातन धर्म में ब्रह्मांड की कल्पना केवल एक दुनिया या एक आकाश तक सीमित नहीं है. भागवत पुराण समेत हिंदू ग्रंथों में असंख्य ब्रह्मांडों, अलग-अलग लोकों और भौतिक दुनिया से परे आध्यात्मिक आयामों का उल्लेख मिलता है.

Mysteries of the Jagannath Temple: उड़ीसा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर अपने धार्मिक महत्व के साथ-साथ कई अनसुलझे रहस्यों के लिए जाना जाता है. हवा के विपरीत लहराता ध्वज हो या मंदिर की गायब होती छाया, जानिए इन 7 प्रमुख रहस्यों का सच.

Sanjeevani Herb: रामायण में लक्ष्मण के प्राण बचाने वाली संजीवनी बूटी का वैज्ञानिक सच क्या है? जानिए क्या सेलाजिनेला ब्रायोप्टेरिस ही असली संजीवनी है और इस पौराणिक औषधि के पीछे का वानस्पतिक सच.

भारतेंदु हरिश्चंद्र हिंदी साहित्य के उन साहित्यकारों में शामिल हैं, जिन्होंने साहित्य को समाज और देश की चिंताओं से जोड़ा है. 9 सितंबर 1850 को काशी में जन्मे भारतेंदु ने नाटक, कविता, पत्रकारिता और निबंध के माध्यम से अपने समय की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं को आवाज दी.


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