Vedic Cosmology vs Quantum Physics: जानिए क्वांटम फिजिक्स और उपनिषदों के बीच का वह सच, जो हर कोई नहीं जानता
वैदिक ब्रह्मांड विज्ञान और क्वांटम फिजिक्स दोनों ही वास्तविकता की तलाश करते हैं. यह लेख दोनों के बीच की दार्शनिक प्रेरणा और वास्तविक सीमाओं को बेहद करीब से समझाता है.
10 हजार करोड़ के कर्ज में ‘रिच डैड’ लेखक? जानिए रॉबर्ट कियोसाकी पर क्यों नहीं है इसका असर
रॉबर्ट कियोसाकी के करीब 1.2 अरब डॉलर यानी लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के कर्ज ने सबका ध्यान खींचा है. कियोसाकी इसे ‘गुड डेट’ मानते हैं, लेकिन साथ ही बिना पर्याप्त वित्तीय समझ के भारी कर्ज लेने से लोगों को सावधान भी करते हैं.
जानिए कौन थे ‘मेरे भारत के कंठहार’ गीत को अमर करने वाले सत्यनारायण, जिन्होंने रची थी बिहार की पहचान
बिहार की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को अपनी लेखनी से स्वर देने वाले वरिष्ठ कवि-गीतकार सत्यनारायण अब सिर्फ यादों में रह गए हैं. 13 सितंबर 1935 को भोजपुर जिले (तत्कालीन शाहाबाद) के कौलोडिहरी गांव में जन्मे कवि शिरोमणि सत्यनारायण कदमकुआं के घर की चहारदीवारी में पड़े-पड़े अकुलाता उनका मन सदा-सदा के लिए आजाद हो गया.
बिंदेश्वर पाठक: भारत में स्वच्छता और सामाजिक सुधार की रूपरेखा बदलने वाले दूरदर्शी, जानें शुरुआती जीवन और योगदान
स्वच्छता को मानवाधिकार और सामाजिक गरिमा से जोड़ने वाले डॉ. बिंदेश्वर पाठक की अनकही कहानी. जानिए कैसे उन्होंने कम लागत वाले शौचालयों के जरिए देश की तस्वीर बदल दी.
राष्ट्रपितामह राजनारायण बसु: बंगाल के वे पुरोधा, जिनकी दूरदर्शी सोच ने गढ़ा आधुनिक भारत
राष्ट्रऋषि राजनारायण बसु भारतीय राष्ट्रवाद, शिक्षा और सांस्कृतिक जागरण के प्रमुख विचारकों में गिने जाते हैं.
‘मैं नहीं, जनता हारती है…’ जानिए कौन थे 280 से ज्यादा चुनाव लड़ने वाले ‘धरतीपकड़’ नागरमल बाजोरिया
उन्होंने पंचायत और वार्ड चुनाव से लेकर विधानसभा, लोकसभा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद तक करीब 280 से 284 चुनाव लड़े. चुनावों की इस लंबी सूची में जीत से ज्यादा उनकी पहचान लगातार चुनाव लड़ने के जुनून से बनी. हालांकि उनके चुनावी रिकॉर्ड को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़े थोड़े अलग मिलते हैं और कहीं-कहीं स्थानीय चुनाव में जीत का भी उल्लेख है, लेकिन आम तौर पर उनकी कहानी लगातार चुनाव हारने के बावजूद मैदान में डटे रहने वाले उम्मीदवार की रही.
5 सितंबर 1972: म्यूनिख ओलंपिक में खूनी खेल, 11 इजरायली खिलाड़ियों की शहादत के बाद कैसे बदली दुनिया की सुरक्षा प्रणाली?
5 सितंबर 1972 को म्यूनिख ओलंपिक में फिलिस्तीनी आतंकियों ने 11 इजरायली खिलाड़ियों की हत्या कर दी थी. इसके जवाब में इजरायल की मोसाद ने 'ऑपरेशन रेथ ऑफ गॉड' चलाकर बदला लिया.
UN में पास हुआ ‘Correct the Map’ प्रस्ताव, 450 साल पुराने मर्केटर मैप से क्या है अफ्रीका की नाराजगी?
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव को 164 देशों के समर्थन से मंजूरी दी है. प्रस्ताव मर्केटर प्रोजेक्शन की लंबे समय से चली आ रही विकृतियों पर सवाल उठाता है और Equal Earth प्रोजेक्शन के इस्तेमाल की सिफारिश करता है.
22 साल की उम्र में मौत को दी मात, जानिए यात्रियों की ढाल बनीं नीरजा भनोट की अनकही कहानी
5 सितंबर 1986 को कराची में पैन एम फ्लाइट 73 के अपहरण के दौरान 22 वर्षीय नीरजा भनोट ने अदम्य साहस दिखाते हुए सैकड़ों यात्रियों की जान बचाई.
IAS की तर्ज पर क्यों नहीं बनी ‘भारतीय शिक्षा सेवा’? जानिए कोठारी आयोग की उस सिफारिश का सच जो दबी रह गई
Indian Education Service: शिक्षक दिवस पर सिर्फ भाषण नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में संस्थागत सुधार की जरूरत है. जानिए क्यों कोठारी आयोग की 'भारतीय शिक्षा सेवा' (IES) की सिफारिश आज भी प्रासंगिक है.







