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ईरान या इजराइल! मिडिल ईस्ट की आग में कौन थामेगा किसका हाथ?

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया नए खेमों में बंटती दिख रही है. जहां पश्चिमी देश और चीन-रूस एक-दूसरे के विपरीत खड़े हैं, वहीं भारत ने ‘शांति और कूटनीति’ का संतुलन बनाए रखा है. जानें इस महायुद्ध के खतरे के बीच कौन किस देश का हाथ थाम रहा है.

Global Politics on Iran Israel War

ये इमेज एआई द्वार बनाई गई है.

मध्य-पूर्व (Middle East) में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और उसके बाद ईरान द्वारा किए गए जवाबी हमलों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति का पारा बढ़ा दिया है. आज हर देश की नजर इस तनाव पर है और सवाल बस एक ही है कि अगर स्थिति बिगड़ी, तो कौन किसके साथ खड़ा होगा? असल में दुनिया इस समय साफ-साफ दो-तीन गुटों में बंटती नजर आ रही है.

पश्चिमी देश और ‘सामूहिक आत्म-रक्षा’

अमेरिका और इजराइल के खेमे में स्वाभाविक रूप से वही देश हैं जो दशकों से उनके सहयोगी रहे हैं. ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने एक साझा बयान जारी कर ईरान की आक्रामक कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की है. ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने साफ किया कि अमेरिका के रक्षात्मक हमलों के लिए ब्रिटिश बेस का इस्तेमाल किया जा सकता है.

हालांकि, वे यह भी जोड़ना नहीं भूले कि ब्रिटेन ने ‘इराक की गलतियों’ से सबक सीखा है, इसलिए वे इस युद्ध में सीधे तौर पर उलझने से बच रहे हैं. यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी ईरान के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए प्रतिबंधों की बात कही है.

रूस और चीन का कूटनीतिक ‘सपोर्ट सिस्टम’

दूसरी ओर, ईरान के समर्थन में रूस और चीन खुलकर सामने आए हैं. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे ‘अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हत्या’ करार दिया है.

वहीं, चीन ने भी इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताते हुए ईरान की संप्रभुता का पक्ष लिया है. इन दोनों देशों के लिए ईरान का समर्थन सिर्फ दोस्ती नहीं, बल्कि अमेरिका के बढ़ते प्रभाव को रोकने का एक जरिया भी है. पाकिस्तान ने भी ईरान के प्रति गहरा दुख और नैतिक समर्थन जाहिर किया है, जो क्षेत्रीय समीकरणों को और जटिल बनाता है.

खाड़ी देशों (GCC) का कशमकश भरा ‘तटस्थ’ रुख

सबसे मुश्किल स्थिति में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के देश जैसे यूएई, सऊदी अरब, ओमान और कतर हैं. इन देशों ने ईरान के हमलों की निंदा की है, क्योंकि उनकी अपनी संप्रभुता पर चोट पहुंची है. ईरान का दावा है कि वह खाड़ी देशों को नहीं, बल्कि वहां मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है, लेकिन हकीकत में ये देश एक बड़ी आग के बीच फंसे हैं. वे शांति चाहते हैं, इसलिए वे बहुत सावधानी से अपने बयान दे रहे हैं.

भारत का ‘संतुलित’ रुख

इसमें भारत का रुख सबसे अलग और परिपक्व है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसराइल के नेतन्याहू और यूएई के राष्ट्रपति, दोनों से फोन पर बात की है. भारत का संदेश साफ है, शांति और कूटनीति. विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत की मेज पर आने की अपील की है. भारत ने न तो किसी खेमे को चुना है और न ही किसी पर आरोप लगाया है. हमारी प्राथमिकता हमारे नागरिक और क्षेत्रीय शांति है.

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-भारत एक्सप्रेस



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