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समंदर में डूब रहा पूरा देश, अब ऑस्ट्रेलिया में बसेगी पूरी आबादी

Tuvalu: जलवायु वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले 80 सालों में पूरा तुवालु समंदर में समा जाएगा. कुछ वैज्ञानिकों का ऐसा भी मानना है कि ये 80 साल नहीं बल्कि अगले 25 सालों में ही ये घटना होगी.

Tuvalu

जलवायु परिवर्तन की वजह से पूरी दुनिया एक नये तरह के खतरे का सामना कर रही है. बारिश वाली जगह भयंकर सूखे से गुजर रही है. तो वहीं हमेशा सूखा और बंजर रहने वाले रेगिस्तान में भयंकर बारिश हो रही है. वैज्ञानिकों का कहना है कि ये सब जलवायु परिवर्तन की वजह से हो रहा है. ध्रुवों पर मौजूद ग्लेशियर पिघल रहे हैं. जिसके चलते समुद्र का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. समुद्र के लगातार बढ़ते जलस्तर की वजह से दुनिया के कई देश डूबने के कगार पर पहुंच चुके हैं. ऐसा ही एक देश है तुवालु.

प्रशांत महासागर में पड़ने वाले छोटे से द्वीपीय देश तुवालु की पूरी आबादी अब ऑस्ट्रेलिया में शिफ्ट होने जा रही है. लगातार बढ़ते समुद्री जलस्तर ने इस खूबसूरत द्वीपीय देश के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा कर दिया है. यह दुनिया में पहली बार होने जा रहा है, जब पूरे देश की आबादी अपना वतन छोड़कर दूसरे देश में बसने जा रही है.

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बेहद खूबसूरत द्वीपीय देश है तुवालु

तुवालु प्रशांत महासागर में पड़ने वाला एक बेहद ही खूबसूरत द्वीपीय देश है. यह कुल 9 कोरल द्वीपों का समूह है. जहां महज 11000 लोग रहते हैं. समुद्र तल से इसकी औसत ऊंचाई सिर्फ 2 मीटर है. जिसके चलते समुद्र का पानी हर दिन यहां के लोगों के लिए मौत बनकर आता है. समुद्र की ऊंची लहरें और ज्वार-भाटा यहां पर हर दिन बाढ़ पैदा कर रही है. इस देश के दो द्वीप पहले ही समुद्र में समा चुके हैं.

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80 साल में डूब जाएगा पूरा देश

जलवायु वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले 80 सालों में पूरा तुवालु समंदर में समा जाएगा. कुछ वैज्ञानिकों का ऐसा भी मानना है कि ये 80 साल नहीं बल्कि अगले 25 सालों में ही ये घटना होगी.

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ऑस्ट्रेलिया से हुई ऐतिहासिक संधि

इस संकट की घड़ी में तुवालु के लिए ऑस्ट्रेलिया मददगार बनकर आगे आया है. 2023 में दोनों देशों के बीच हुए ऐतिहासिक फलेपिली संधी ने तुवालु के लोगों के लिए ऑस्ट्रेलिया के दरवाजे खोल दिये हैं. इसके तहत हर साल 280 तुवालु निवासी ऑस्ट्रेलिया में स्थाई रूप से बसेंगे. जहां उन्हें स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, नौकरी और घर समेत सभी अधिकार दिये जाएंगे.

गौरतलब है कि, तुवालु लंबे समय से वैश्विक मंच पर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ आवाज उठा रहा है. तुवालु के नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ उनके देश की नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है. अगर ये देश अभी नहीं चेते, तो आने वाले समय में कई द्वीपीय देश विश्व के नक्शे से गायब हो सकते हैं.

– भारत एक्सप्रेस



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