Devices Seized Near UN: न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की 80वीं बैठक चल रही है. उससे पहले अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने बड़ा खुलासा किया है. सीक्रेट सर्विस ने कहा है कि, उसने न्यूयॉर्क में एक ऐसे बड़े नेटवर्क के बारे में पता लगाया है, जिसमें ऐसे-ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं. जो सेलफोन नेटवर्क को बाधित करने में पूरी तरह से सक्षम हैं.
क्या इसका उपयोग न्यूयॉर्क में जुट रहे विश्व के नेताओं के खिलाफ किसी साजिश के तहत होने वाला था, इसकी जानकारी सीक्रेट सर्विस ने नहीं दी है. यहीं एजेंसी अमेरिकी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की सुरक्षा का जिम्मा संभालती है.

गंभीर नुकसान पहुंचाने में सक्षम है नेटवर्क
इस बारे में अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के निदेशक सीन करन ने कहा कि यह नेटवर्क गंभीर नुकसान पहुंचा पाने में सक्षम है. इसका उपयोग क्षेत्र में लगे सेलफोन टावरों को बंद करने से लेकर अपराधियों और विदेशी दुश्मनों के बीच कम्युनिकेशन की सुविधा देने तक में हो सकता है. यहां तक की इस नेटवर्क का उपयोग जासूसी के लिए भी किया जा सकता है.
मिले 1 लाख सिम कार्ड
सीक्रेट सर्विस ने बताया कि न्यूयॉर्क सिटी के आसपास के इलाकों में कई जगहों से 300 से ज्यादा सिम सर्वर, 1 लाख सिम कार्ड और अन्य अवैध सामग्री बरामद हुई है. सीक्रेट सर्विस के एजेंट, न्यूयॉर्क पुलिस विभाग और होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन समेत अन्य एजेंसियां इसकी जांच कर रहे हैं.

अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के वॉशिंगटन फील्ड ऑफिस के प्रभारी विशेष एजेंट मैट मैककूल ने जानकारी देते हुए मीडिया को बताया है कि, शुरुआती फॉरेंसिक जांच में कम से कम एक विदेशी देश और ऐसे कई अपराधियों की संलिप्तता सामने आई है. इन सभी लोगों पर एजेंसियां पहले से ही निगरानी कर रही थीं.
अभी चल रही मामले की जांच
मैककूल ने बताया कि इस मामले की अभी भी जांच की जा रही है. शुरुआती चरण में ही इस खतरे की जानकारी जनता से साझा किया गया है. ताकि सुरक्षा को पुख्ता किया जा सके.

अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी और विशेषज्ञ लगातार दूरसंचार कंपनियों में होने वाले घुसपैठ की निगरानी कर रहे हैं. इन घुसपैठों का मकसद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर अमेरिका के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की निजी बातचीत चुराना है.
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चीनी समूह का नाम आ रहा सामने
सीक्रेट सर्विस ने इस हमले के पीछे ‘सॉल्ट टाइफून’ नाम के एक समूह को जिम्मेदार माना है. जो चीनी सरकार के लिए काम करता है. सीक्रेट सर्विस ने इस अभियान का पिछले साल ही खुलासा किया था.
अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने यह नहीं बताया है कि न्यूयॉर्क में पकड़े गए इन उपकरणों का सॉल्ट टाइफून के अभियानों से कोई संबंध है या नहीं.
फिलहाल अभी तक यह साफ नहीं है कि न्यूयॉर्क सिटी के आसपास यह नेटवर्क कब से सक्रिय था और इसके संचालक संयुक्त राष्ट्र महासभा को बाधित करना चाहते थे या फिर जासूसी करना. फिलहाल सीक्रेट सर्विस मामले की जांच में जुटी हुई है.
– भारत एक्सप्रेस
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