विधेयकों को मंजूरी में देरी को लेकर दायर तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 10 फरवरी को सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि द्वारा कुलपतियों की नियुक्ति से संबंधित विधेयक को प्रतिकूल बताने पर अटॉर्नी जनरल से पूछा कि यदि विधानसभा द्वारा प्रस्तावित विधेयक यूजीसी दिशानिर्देशों के विपरीत है, तो क्या राज्यपाल इसे प्रतिकूल कह सकते है? कोर्ट ने पूछा क्या यह राज्यपाल की समझ है? कोर्ट ने एजी से कहा आप हमें यह परिभाषित करने के लिए मजबूर कर रहे हैं कि प्रतिरोध क्या है.
कोर्ट ने कहा कि यदि आप चाहते हैं कि हम अपने फैसले में इसका भी जवाब दें, तो हम ऐसा करेंगे. जस्टिस जे. बी पारदीवाला और आर. महादेवन की बेंच तमिलनाडु सरकार की ओर से दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्यपाल से इसका कानूनी आधार मांगा था और अस्वीकृति के कारणों को स्पष्ट करने को कहा था. कोर्ट ने कहा था कि ऐसा लगता है कि राज्यपाल ने अपनी एक अलग प्रक्रिया बना ली है, जो संविधान का हिस्सा नहीं है. कोर्ट ने राज्यपाल से ऐसा करने का कानूनी आधार पूछा था.
जानें कोर्ट ने और क्या कहा?
आपको बता दें कोर्ट ने कहा था कि ऐसा लगता है कि राज्यपाल ने अपनी प्रक्रिया अपना ली है. वह कहते हैं कि मैं मंजूरी नहीं दूंगा लेकिन मैं आपसे विधेयक पर पुनर्विचार करने के लिए नहीं कहूंगा. सहमति को रोके रखना और उसे विधानमंडल के पास न भेजना, जिससे अनुच्छेद 200 का प्रावधान विफल हो जाता है, इसका कोई मतलब नहीं है. वही तमिलनाडु अटॉर्नी जनरल ने तमिलनाडु सरकार की दलीलों का विरोध करते हुए कहा था कि राज्य सरकार की दलीलें यह साबित करने की कोशिश कर रही हैं कि राज्यसभा बहुत ही तुच्छ महत्वहीन है.
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-भारत एक्सप्रेस
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