वक्फ संशोधित कानून 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 22 मई को भी जारी रहेगी. सीजेआई बी. आर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच सुनवाई कर रही है. मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जिन व्यक्तियों द्वारा यह जनहित याचिका दायर की गई है, उनमें से कोई प्रभावित पक्ष या व्यक्ति नही है.
उन्होंने कहा कि सिर्फ कुछ लोग याचिका दाखिल करके पूरे मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधि नहीं बन सकते है. वो यह नहीं कह सकते कि जिन चीजों से उन्हें दिक्कत है, पूरा मुस्लिम समुदाय भी वही सोचता है. संसद के पास विधायी क्षमता है या नहीं यह सवाल ही नही है. यही एक मात्र आधार था जिसपर पहले किसी कानून पर रोक लगाई गई थी. सीजेआई बीआर गवई ने कहा कि इनकी आपत्ति यह है कि इस मामले में सरकार अपना ही दावेदारी का निर्णय खुद करेगी.
सरकार की दलील: संसद को पूर्ण विधायी अधिकार
एसजी तुषार मेहता ने कहा कि यह राजस्व अधिकारी तय करते हैं कि भूमि सरकारी है या नहीं. एसजी मेहता ने कहा कि 1923 से 1995 के कानून तक व्यवस्था थी कि सिर्फ मुस्लिम ही वक्फ कर सकता था, लेकिन साल 2013 में चुनाव से पहले कानून बना दिया गया कि कोई भी वक्फ कर सकता है. उन्होंने कहा कि सरकार ने इसे सुधारा हैं और वक्फ करने के लिए कम से कम 5 साल से इस्लाम धर्म का पालन करने की शर्ते रखी गई है.
उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि इस कानून को लेकर 97 लाख से अधिक लोगों से सुझाव प्राप्त हुए, और जेपीसी की 36 बैठकें हुई जिनमें इन संशोधन पर विस्तार से चर्चा हुई. इसके अलावे 25 वक्फ बोर्डों से राय ली गई, राज्यों से भी सलाह-मशविरा किया गया. कानून में संशोधन से पहले हर पहलुओं पर विचार विमर्श किया गया.
एसजी ने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति सरकारी जमीन पर अधिकार का दावा नही कर सकता है. सरकार ने यह साफ कर दिया है कि उसे वक्फ बाय यूजर के नाम पर वक्फ घोषित की गई सरकारी सम्पत्तियों का वापस कब्जा पाने का कानूनी अधिकार है. वक्फ बाय यूजर काआशय ऐसी संपत्ति से हैं जहां किसी संपत्ति को औपचारिक दस्तावेज के बिना भी धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए वक्फ के रूप में मान्यता दी जाती है.
वक्फ बाय यूजर पर सरकार का रुख सख्त
एसजी ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा चुका है कि अगर संपत्ति सरकार की है तऔर उसे वक्फ घोषित किया गया है, तो सरकार उसे बचा सकती है. एसजी मेहता ने कहा कि मैं सीधे धारा से पढ़ रहा हूं. एक अभियान चल रहा है कि 100 साल पुरानी संपत्ति हम कागज कहां से लाएंगे. मुझे बताइए कि कागज कभी जरूरी नहीं थे. यह एक कहानी बनाई जा रही है. अगर आप कहते हैं कि वक्फ 100 साल से पहले बना था तो आप सिर्फ पिछले 5 सालों के ही दस्तवेज़ पेश करेंगे. यह महज एक औपचारिकता नही थी. अधिनियम के साथ एक पवित्रता जुड़ी थी.
इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान सीजेआई गवई ने कहा था कि संसद द्वारा पारित किसी भी कानून में संवैधानिकता की धारणा होती है और जब तक कि उसमें कोई ठोस मामला सामने नहीं आता, तब तक अदालतें इसमें दखल नहीं दे सकती है.
वही केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि सुनवाई को तीन मुद्दों तक ही सीमित रखना चाहिए. वक्फ बाय यूजर, वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डो में गैर.-मुस्लिमों की नियुक्ति और वक्फ के तहत सरकारी भूमि की पहचान तक ही केंद्रित रखा जाए. जिसका मुश्लिम पक्षकारों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने विरोध किया और कहा कि सभी मुद्दों पर सुनवाई होनी चाहिए. टुकड़ों में सुनवाई नही होनी चाहिए.
संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन—सिब्बल
सुनवाई के दौरान सिब्बल ने कानून की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए, उन्होंने कहा कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का सीधा उल्लंघन करता है, जो.समानता, धर्म की स्वतंत्रता और धार्मिक संस्थाओं के अधिकारों की गारंटी देता है. इस दौरान सीजेआई बी.
आर गवई ने खजुराहों के एक मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि वह.मंदिर पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है और फिर भी लोग वहां जाकर पूजा कर सकते है. इसपर कपिल सिब्बल ने कहा कि नया कानून कहता है कि अगर यह एएसआई संरक्षित क्षेत्र है तो यह वक्फ नहीं हो सकता है.
सिब्बल ने कहा कि ये गैर कानूनी है और वक्फ संपत्ति के कंट्रोल को छीनने वाला है. वक्फ की जाने वाली संपत्ति पर किसी विवाद की आशंका से जांच होगी. कलेक्टर करेंगे और कलेक्टर सरकारी आदमी है. ऐसे में जांच की कोई समय सीमा नहीं है. जब तक रिपोर्ट नही आएगी, संपत्ति वक्फ नहीं हो सकती. जबकि अल्लाह के नाम पर संपत्ति दी जाती है. एक बार.वक्फ हो गया तो हमेशा के लिए हो गया.
वक्फ बोर्ड की संरचना में बड़ा बदलाव
सिब्बल ने आगे कहा कि मंदिरों की तरह मस्जिदों मेंहजार दो हजार करोड़ का चढ़ावा नहीं होता. ये संस्थाए दान से चलती है. जिसपर सीजेआई ने कहा कि दरगाह, चर्च वो गए है, वहां भी चढ़ावा चढ़ाया जाता है.
नया कानून कहता है कि जैसे ही किसी भी इमारत को एएसआई एक्ट के तहत प्राचीन संरक्षित स्मारक घोषित किया जाता है, उस पर वक्फ का अधिकार खत्म हो जाएगा. सिब्बल ने यह भी कहा कि पहले वक्फ बोर्ड में लोग चुनकर आते थे और सभी मुस्लिम होते थे. अब सभी मनोनीत होंगे और 11 सदस्यों में से 7 अब गैर मुस्लिम हो सकते है.
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-भारत एक्सप्रेस
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