देशद्रोह के मामले में दोषी ठहराए गए प्रतिबंधित स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के पूर्व महासचिव सफदर नागोरी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.नागोरी ने दायर याचिका में मांग कि है कि निचली अदालत से मिली आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ उसकी अपील को हाई कोर्ट में सुनवाई की इजाजत दे. सुप्रीम कोर्ट ने दायर याचिका पर मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट जुलाई के दूसरे सप्ताह बाद में अगली सुनवाई करेगा.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील शादान फरासत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में अंतरिम आदेश जारी करते हुए देश भर में देशद्रोह के मामलों पर रोक लगा दिया था. जिसकी वजह से उनकी ओर से दायर अपील पर सुनवाई नही हो पा रही हैं.
देशद्रोह और अन्य मामलों में उम्रकैद की सजा
नागोरी को फरवरी 2017 में इंदौर की निचली अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 124 A (देशद्रोह) और अन्य धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. जिसके खिलाफ मध्य प्रदेश के इंदौर खंडपीठ में अपील दायर की थी. 54 वर्षीय नागोरी मध्य प्रदेश के उज्जैन का रहने वाला है, और यह सिमी का राष्ट्रीय महासचिव था. उसके पिता क्राइम ब्रांच में.असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर थे. 2001 में सिमी पर प्रतिबंध लगने के बाद नागोरी अंडरग्राउंड हो गया था.
नागोरी लगभग 100 आपराधिक मामलों में आरोपी है और उसके खिलाफ उज्जैन के महाकाल पुलिस स्टेशन में 1997 में पहला आपराधिक मामला दर्ज किया गया था. नागोरी को 26 मार्च 2008 को गिरफ्तार किया गया था, तब से वह जेल में बंद है. वर्ष 2008 में अहमदाबाद में सिलसिलेवार बम धमाकों के मास्टरमाइंड था. 26 जुलाई 2008 को हुई इन धमाकों में 57 लोगों की मौत हो गई थी.
-भारत एक्सप्रेस
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