National Herald case: दिल्ली हाई कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली ईडी की याचिका पर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस रविन्द्र डुडेजा की कोर्ट ने यह नोटिस जारी किया है. कोर्ट मार्च के पहले हफ्ते में करेगा अगली सुनवाई करेगा.
ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को केस के तथ्यों के बारे में बताते हुए कहा कि आखिर में नतीजा यह है कि 50 लाख की रकम के लिए आरोपी को 2000 करोड़ की प्रॉपर्टी मिली. एसजी मेहता ने केस का हवाला देते हुए कहा कि एक प्राइवेट आदमी ने सक्षम कोर्ट में एक प्राइवेट शिकायत दर्ज की थी और कोर्ट ने उस पर संज्ञान लिया. इस संज्ञान को इस कोर्ट में चुनौती दी गई थी और इस कोर्ट ने खारिज कर दिया.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि क्या कोई ऐसा मामला लंबित है, जिसमें किसी प्राइवेट शिकायत और कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने के आधार पर ईडी ने कोई केस शुरू किया हो. कोर्ट ने पूछा था कि यह पहला मामला हो सकता है? एसजी मेहता ने कहा कि पीएमएलए में अपराध के रजिस्ट्रेशन का तरीका नहीं बताया गया है. जरूरी यह है कि एक आरोप हो, एक क्रिमिनल एक्टिविटी हो और वह क्रिमिनल एक्टिविटी शेडयूल्ड अपराध से जुड़ी हो. इसमें एफआईआर या क्रिमिनल शिकायत का जिक्र नहीं है. मेरे हिसाब से, क्रिमिनल शिकायत ज्यादा अहम है. मैं इस बात पर जोर दे रहा हूं कि इसकी जांच करने की जरूरत है.
कोर्ट ने मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि क्या कोर्ट ने शिकायतकर्ता की जांच करने के बाद (सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत का) संज्ञान लिया था? सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा हां, और गवाहों की भी. ईडी द्वारा दायर अपील में कहा गया है कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में कई कानूनी खामियां हैं और इस शिकायत पर आगे बढ़ना जरूरी है. निचली अदालत ने 16 दिसंबर को सोनिया गांधी सहित अन्य के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था.
कोर्ट ने कहा था कि पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत कार्रवाई के लिए शेडयूल्ड ऑफेंस की एफआईआर जरूरी है, लेकिन यहां मामला स्वामी की निजी शिकायत पर आधारित था, न कि किसी पुलिस एफआईआर पर. कोर्ट ने अपने फैसले के स्पष्ट किया कि निजी शिकायत के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच और अभियोजन शिकायत वैध नहीं है.
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